उत्तर प्रदेश के अमेठी जिले में 'जनगणना प्रशिक्षण' (Census Training) के दौरान परोसे गए भोजन का विवाद अब एक बड़े प्रशासनिक और सियासी बवाल में बदल चुका है. बासी और रद्दी खाना परोसे जाने की शिकायत करना शिक्षकों को इतना भारी पड़ गया कि प्रशासन ने वेंडर पर कार्रवाई करने के बजाय शिकायत करने वाले शिक्षकों और खबर दिखाने वाले मीडियाकर्मियों पर ही हंटर चला दिया है.
जामों ब्लॉक परिषद में प्रशिक्षण ले रहे पचासों कर्मचारियों ने खराब खाने का विरोध करते हुए उसे फेंक दिया था और एसडीएम से इसकी शिकायत की थी. इस मामले में बेसिक शिक्षा विभाग (BSA) ने सख्त रवैया अपनाते हुए शिक्षक संघ के ब्लॉक अध्यक्ष सहित 13 शिक्षकों को 'कारण बताओ नोटिस' (Show Cause Notice) थमा दिया है.
मीडिया के सामने बयान देने वाले शिक्षक ओम नारायण पांडेय को सीधे सस्पेंड (Suspend) कर बहादुरपुर से अटैच कर दिया गया है. सस्पेंड हुए शिक्षक ने आरोप लगाया है कि उन पर शिकायत वापस लेने और सार्वजनिक माफी मांगने का दबाव बनाया गया था. माफी न मांगने पर उन्हें निलंबित कर दिया गया, जबकि संघ के अध्यक्ष पर कोई कार्रवाई नहीं हुई.
प्रशासन की छवि खराब करने का आरोप
इस मामले ने तब और तूल पकड़ लिया जब गौरीगंज के तहसीलदार सूरज प्रताप सिंह की तहरीर पर 'अज्ञात मीडियाकर्मियों' के खिलाफ ही मुकदमा दर्ज कर लिया गया. प्रशासन का तर्क है कि भोजन की गुणवत्ता बिल्कुल ठीक थी, लेकिन सोशल मीडिया और न्यूज़ चैनलों पर भ्रामक खबरें फैलाकर शांति भंग करने और सरकार की छवि धूमिल करने की कोशिश की गई है. पुलिस ने BNS 2023 और IT एक्ट की गंभीर धाराओं में केस दर्ज किया है.
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DM बोले- 'तहसीलदार ने खाकर किया चेक, सब ठीक था'
इस पूरे बवाल पर अमेठी के जिलाधिकारी (DM) संजय चौहान ने मोर्चा संभालते हुए इसे एक साजिश करार दिया है. डीएम ने कहा कि घटना वाले दिन ही तहसीलदार ने 10 अन्य लोगों के साथ बैठकर वही फूड पैकेट खाया था और उसमें कोई कमी नहीं मिली. उसी वेंडर ने तीन ब्लॉकों में खाना भेजा था, जहां से कोई शिकायत नहीं आई.
डीएम के मुताबिक, "सिर्फ एक व्यक्ति ने अपने स्वार्थ और शासन की छवि खराब करने के लिए यह झूठा आरोप लगाया है." उन्होंने बिना पुष्टि खबर चलाने वाले ट्विटर हैंडल्स (Twitter Handles) को ब्लॉक करने और कार्रवाई के निर्देश भी दिए हैं.
फिलहाल, खराब खाने की शिकायत पर प्रशासन के इस 'एक्शन' से जहां एक तरफ शिक्षकों में भारी आक्रोश है, वहीं मीडियाकर्मियों में भी पुलिस-प्रशासन की इस दमनकारी कार्यशैली को लेकर गहरी नाराजगी है.
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