सोनभद्र. सरकार के तमाम दावों के बावजूद स्वास्थ्य सेवाओं का हाल ठीक नहीं है. आदिवासी बहुल्य जिले सोनभद्र में महिला को उस वक्त बीच रास्ते में प्रसव कराना पड़ा, जब उस एंबुलेंस समय से नहीं मिली. परिजनों द्वारा 102 व 108 नंबर पर एंबुलेंस को फोन किया गया लेकिन किसी ने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी. जानकारी ये भी मिली है कि सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में एंबुलेंस होने के बावजूद डीजल डलवाने को लेकर विवाद हो गया था.

सोनभद्र के आदिवासी क्षेत्र बभनी के गांव अरझट अपने मायके आयी गर्भवती महिला फुल कुमारी की जब प्रसव पीडा से हालत खराब होने पर परिजनों ने 102 और 108 नंबर पर एंबुलेंस से संपर्क किया, लेकिन घंटों बाद जब कोई नहीं पहुंचा तो हालत बिगड़ती देख परिजनों ने पीड़िता को मोटरसाइकिल से लेकर अस्पताल चल दिया. बभनी अस्पताल से चंद कदम दूरी पर अचानक तबियत बिगड़ने पर पीड़ित महिला को परिजनों ने सड़क पर लिटा दिया. दर्द से तडप रही महिला को देखने कोई नहीं आया. परिजनों को मजबूरन डिलिवरी बीच सड़क पर ही करानी पड़ी. जो सरकार के सभी वादों, योजनाओं की पोल खोल कर रख देता है. हालांकि जच्चा और बच्चा दोनों स्वस्थ हैं.

डीजल देने की बात कहने पर मिली एंबुलेंस

महिला के रिश्तेदार ने बताया कि हमने बहुत प्रयास किये एंबुलेंस के लिये, वहीं, डॉक्टर से बात करने पर कहा कि अभी सारी एंबुलेंस व्यस्त हैं. यहीं नहीं, रिश्तेदार ने कहा कि एक एंबुलेंस रास्ते में जा रही थी, उसे रोका और डॉक्टर से बात की तो बताया कि वह दूसरे अस्पताल की एंबुलेंस हैं और हम उसको नहीं भेज सकते हैं, क्योंकि डीजल का मामला होता है. जब हम लोगों ने डीजल देने की बात कही, तब एंबुलेंस आई और महिला को बभनी अस्पताल ले गई.

वहीं, मुख्य चिकित्साधिकारी ने कहा कि सड़क पर एक महिला ने नवजात को जन्म दिया है. इस मामले की जांच में यह सामने आया है कि परिजनों द्वारा रात 8 बजकर 30 मिनट पर एंबुलेंस के लिए फोन किया गया था जबकि 9 बजकर 8 मिनट पर एंबुलेंस पहुंच गयी थी.

ये भी पढ़ें.

अयोध्या: मंदिर निर्माण के लिए भूमि के विस्तारीकरण का काम शुरू, एलएंडटी को सौंपी गई जिम्मेदारी

बाराबंकी: सरयू खतरे के निशान से नीचे पहुंची, बाढ़ से राहत के बाद संक्रामक रोगों का खतरा बढ़ा