मुस्लिम धर्म छोड़कर सनातनी बने मोहम्मद अहसान, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने दी कानूनी रूप से इजाजत
Allahabad High Court ने मोहम्मद अहसान को इस्लाम छोड़कर सनातन धर्म अपनाने की प्राधिकारी से अनुमति मिलने के बाद चार हफ्ते में एडीएम प्रशासन प्रयागराज को आदेश पारित करने का निर्देश दिया.

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मोहम्मद अहसान उर्फ अनिल पंडित को इस्लाम धर्म छोड़कर सनातन धर्म को अपनाने की इजाज़त दे दी है. कोर्ट ने उत्तर प्रदेश विधि विरुद्ध धर्म संपरिवर्तन प्रतिषेध अधिनियम, 2021 के तहत की अनुमति मोहम्मद अहसान को इस्लाम छोड़कर सनातन धर्म अपनाने की प्राधिकारी से अनुमति मिलने के बाद चार हफ्ते में एडीएम प्रशासन प्रयागराज को आदेश पारित करने का निर्देश दे दिया.
कोर्ट ने याची को सभी दस्तावेजों में नाम परिवर्तन की कार्रवाई करने और अदालत को दिये अपने आश्वासन पर अमल करने का निर्देश दिया. कोर्ट ने कहा कि यदि अधिनियम की धारा 8 एवं 9 के अंतर्गत आवश्यक वैधानिक प्रक्रिया का अनुपालन कर लिया गया है तो प्रशासनिक अधिकारी अनिश्चितकालीन जांच, संदेह या फिर व्यक्तिगत संतुष्टि के आधार पर किसी व्यक्ति की धार्मिक पहचान अथवा धर्म परिवर्तन को बाधित नहीं कर सकते.
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने दिए निर्देश
याचिकाकर्ता डॉ. मोहम्मद एहसान उर्फ अनिल पंडित सीएमपी डिग्री कॉलेज, प्रयागराज में अंग्रेजी विषय में असिस्टेंट प्रोफेसर के पद पर कार्यरत हैं. इन्होंने इस्लाम छोड़कर सनातन धर्म अपनाने की वैधानिक प्रक्रिया पूर्ण की और अनुमति के लिए आवेदन भी दिया. प्रशासनिक स्तर पर उनके धर्म परिवर्तन को स्वीकार नहीं किया जा रहा था, जिसके बाद उन्होंने इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी.
कोर्ट के निर्देश पर एडीएम प्रशासन ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि धर्म परिवर्तन का आवेदन स्वीकार कर लिया गया है. याची वर्ष 2022 से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से भी जुड़े हुए हैं. उनकी पत्नी भी एक शिक्षाविद् हैं और बलिया स्थित राजकीय इंटर कॉलेज में अंग्रेजी विषय की प्रवक्ता के पद पर कार्यरत हैं.
प्रशासनिक अस्वीकार्यता के कारण दंपत्ति को विवाह पंजीकरण, पहचान पत्र, शासकीय अभिलेखों तथा अन्य वैधानिक अधिकारों के संबंध में गंभीर कठिनाइयों एवं मानसिक पीड़ा का सामना करना पड़ रहा था. यहां तक कि उनकी वैवाहिक पहचान एवं भावी पारिवारिक अधिकार भी अनिश्चितता के घेरे में आ गए थे.
मोहम्मद अहसान का धर्मांतरण स्वीकार
हाईकोर्ट ने अपने पूर्व आदेश 05 मई 2026 से कहा था कि अधिनियम की धारा 8(1) के अंतर्गत आवश्यक घोषणा पूर्व में ही प्रस्तुत की जा चुकी थी. विधिक प्रक्रिया का अनुपालन प्रथम दृष्टया विद्यमान था. इसके पश्चात न्यायालय के हस्तक्षेप पर अपर जिलाधिकारी (प्रशासन), प्रयागराज द्वारा दिनांक 14.मई 2026 को अंतिम आदेश पारित कर याची के धर्म परिवर्तन आवेदन को स्वीकार कर लिया गया.
इस मामले पर जस्टिस अजित कुमार और जस्टिस इन्द्रजीत शुक्ल की डिवीजन बेंच में हुई. याची की ओर से अधिवक्ता आशीष कुमार श्रीवास्तव ने बहस की. उन्होंने कहा कि प्रशासनिक अधिकार संविधान प्रदत्त व्यक्तिगत स्वतंत्रता से ऊपर नहीं हो सकते. अधिनियम की प्रक्रिया पूर्ण होने के बाद प्रशासनिक अड़चनें विधि सम्मत नहीं मानी जा सकतीं.
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