स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद पर झूठा यौन शोषण आरोप लगाने का मामला, हाईकोर्ट ने एक हफ्ते में मांगी रिपोर्ट
Shankaracharya Avimukteshwaranand पर झूठा यौन शोषण लगाने के मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट में सुनवाई हुई. कोर्ट ने इस मामले में सरकार से एक हफ्ते में रिपोर्ट मांगी है.

ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के खिलाफ झूठा यौन शोषण आरोप लगाने का मामला अब इलाहाबाद हाई कोर्ट पहुंच चुका है. कोर्ट ने यूपी सरकार से याचिका पर एक हफ्ते में रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए हैं. वहीं शंकराचार्य पर यौन शोषण का आरोप लगाने वाले आशुतोष ब्रह्मचारी को भी पक्षकार बनाने का निर्देश दिया है.
इस मामले पर जस्टिस जे.जे. मुनीर की सिंगल बेंच में सुनवाई हुई. ये याचिका शाहजहांपुर निवासी पत्रकार रमाशंकर दीक्षित की ओर से संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत ये याचिका दायर की गई है. इस मामले पर अगली सुनवाई 16 जुलाई 2026 को होगी. कोर्ट ने प्रकरण को नए वाद (Fresh Case) के रूप में सूचीबद्ध करने का आदेश दिया गया है.
झूठा यौन शोषण आरोप लगाने का दबाव
इस याचिका में आरोप लगाया गया है कि 18 फरवरी 2026 को तीन अज्ञात व्यक्तियों ने पत्रकार रमाशंकर दीक्षित से संपर्क कर उन्हें धन का प्रलोभन दिया. कथित रूप से ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के विरुद्ध उनकी दो नाबालिग पुत्रियों के यौन शोषण का झूठा आरोप लगाने के लिए दबाव बनाया.
याचिकाकर्ता का कहना है कि प्रस्ताव ठुकराने के बाद उन्हें और उनके परिवार को लगातार जान से मारने की धमकियां दी गईं. याची के घर की कथित रूप से रेकी भी कराई गई. याचिका के अनुसार, शिकायत के बाद पुलिस प्रशासन ने सुरक्षा के लिए पुलिसकर्मियों की तैनाती की लेकिन, सुरक्षा में लगाए गए कुछ पुलिसकर्मियों ने भी कथित रूप से याचिकाकर्ता पर अपना बयान बदलने का दबाव बनाया.
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परिवार की सुरक्षा को बताया खतरा
याचिकाकर्ता का कहना है कि इस संबंध में विभिन्न प्रशासनिक एवं पुलिस अधिकारियों को शिकायत की गई. लेकिन, इसके बावजूद कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की हुई. जिसके बाद उन्होंने इलाहाबाद हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया. याचिका में यह भी कहा गया है कि याचिकाकर्ता की दो नाबालिग बेटियां हैं और उनके पूरे परिवार की सुरक्षा खतरे में है.
इसी आधार पर न्यायालय से याचिकाकर्ता एवं उसके परिवार की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की गई है. हाईकोर्ट से आवश्यक विधिक संरक्षण प्रदान करने की मांग की गई है. याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता डॉ. गजेन्द्र सिंह यादव ने अदालत में पक्ष रखा.























