ऑल इंडिया शिया पर्सनल लॉ बोर्ड के अध्यक्ष मौलाना सैयद सायम मेंहदी और जर्नल सेक्रेटरी, मौलाना यात्तूब अब्बास ने आज शुक्रवार (26 दिसंबर, 2025) को लखनऊ में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए बताया कि ऑल इंडिया शिया पर्सनल लॉ बोर्ड का वार्षिक अधिवेशन 28 दिसम्बर 2025 को होने जा रहा है. यह अधिवेशन इमामबाड़ा आसिफ उदद्दौला (बड़ा इमामबाड़ा) के लखनऊ में दिन के 11 बजे आयोजित किया जाएगा.
इस अधिवेशन में पूरे देश से उलेमा, खुतबा, बुद्धिजीवी और समुदाय के जिम्मेदार लोग शिरकत कर रहे हैं. वहीं इस प्रेस कॉन्फ्रेंस को मौलाना जहीर अब्बास, मौलाना जाफर अब्बास, मौलाना अनवर हुसैन रिजवी, मौलाना एजाज अतहर और मौलाना इन्तिजाम हैदर व जहीर मुस्तफा ने भी संबोधित किया है.
शिया मुसलमानों के लिए अलग कमीशन मांग
ऑल इंडिया शिया पर्सनल लॉ बोर्ड के राष्ट्रीय अधिवेशन में कई मुद्दों पर विचार किया जाएगा. जिसमें सबसे पहले हिंदुस्तान में Common Civil Code को लागू किए जाने पर विचार करेंगे. वहीं जन्नत-उल-बकी मदीना, सउदी अरब में रौजों के पुर्ननिर्माण की मांग भी की जाएगी. इस बैठक में सच्चर कमीशन की तरह शिया मुसलमानों के हालातों को जानने के लिए एक अलग कमीशन बनाने की मांग पर भी विचार होगा. जो हिस्सा अल्पसंख्यकों कि ओर से सरकार को दिया जाता है , उसमें शिया मुसलमानों को उनकी आबादी के अनुपात में हिस्सा देने की मांग भी करी जाएगी.
8 करोड़ शिया मुसलमानों का विधान सभाओं में प्रतिनिधित्व
राष्ट्रीय अधिवेशन में शिया मुसलमानों के लिए आरक्षण की मांग और देश में फैले 8 करोड़ शिया मुसलमानों का पार्लियामेंन्ट और देश की विधान सभाओं में प्रतिनिधित्व पर चर्चा होगी. वहीं समाजिक सुधार में खास कर शादी ब्याह, और गमी के मौके पर बेजा खर्चा में सुधार का प्रस्ताव भी रखा जाएगा. ऑल इंडिया शिया पर्सनल लॉ बोर्ड के अध्यक्ष का कहना है कि, वार्षिक अधिवेशन में हिन्दुस्तान और पूरी दुनियां में फैले आतंकवाद की निन्दा और उसको रोकने का भी प्रस्ताव रखा गया है. जिसमें शियों की धार्मिक और प्रचलित शिक्षा में सुधार और तरक्की की बात होगी. वहीं नफरत फैलाने वाले भाषणों और मॉब लिंचिंग रोकने के लिए कानूनी उपायों पर भी विचार किया जाएगा.
हिजाब पर किसी भी तरह के रोक पर चर्चा
वक्फ बोर्ड में हो रहे भष्टाचार और वक्फ सम्पत्तियों की बिक्री तथा वक्फ संशोधन अधिनियम 2024 पर विशेष बात करी जाएगी. वहीं हिजाब पर किसी भी तरह की रोक लगाने की मांग पर भी चर्चा होगी. जिसके बाद इस्लाम की सही, सच्ची और असली तस्वीरें, जो बादशाहों के किरदार की न होकर मुहम्मद (स.अ.व.) और उनकी औलाद की शिक्षाओं की रौशनी पर हो, उसको दुनिया के सामने पेश भी किया जाएगा.