अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय की एक महिला प्रोफेसर ने अपने विभागाध्यक्ष और संकाय प्रमुख (डीन) पर मानसिक उत्पीड़न का आरोप लगाते हुए कहा है कि जानबूझकर उनके काम में रुकावट डाली गई और उनकी वरिष्ठता की अनदेखी की गयी है.
एएमयू के राजनीति विज्ञान विभाग की प्रोफेसर रचना कौशल ने बृहस्पतिवार को संवाददाताओं से कहा कि उनके विभागाध्यक्ष और डीन जानबूझकर उनकी वरिष्ठता की अनदेखी कर रहे हैं और उनके काम में बाधा उत्पन्न कर रहे हैं.
महिला प्रोफेसर ने लगाए उत्पीड़न के आरोप
प्रोफेसर ने आरोप लगाते हुए कहा कि उन्होंने पिछले साल सितंबर में एएमयू की कुलपति प्रोफेसर नईमा खातून के सामने यह मुद्दा उठाया था लेकिन अब तक उनकी शिकायत पर कोई कार्रवाई नहीं की गई है. उन्होंने कहा कि अब वह विश्वविद्यालय के विजिटर को लिखित शिकायत देने की योजना बना रही हैं और अगर जरूरत पड़ी तो अदालत का दरवाजा भी खटखटाएंगी.
रचना कौशल ने कहा कि अगर विश्वविद्यालय के अधिकारियों ने उनके आरोपों को गंभीरता से लिया होता तो वह इस मामले को सार्वजनिक रूप से नहीं उठातीं. उन्होंने इस बात पर बल दिया कि यूनिवर्सिटी से की गई अपनी शिकायतों में उत्पीड़न के कारण के रूप में कभी भी धार्मिक पहचान का जिक्र नहीं किया.
कौशल ने कहा, "मैं 25 साल से अधिक समय से एएमयू में हूं और इस संस्थान की बहुत आभारी हूं. एएमयू मेरी कर्मभूमि है और मैं कभी झूठे इल्जाम नहीं लगाऊंगी."
धार्मिक पहचान के चलते परेशान करने का आरोप
हालांकि, 'पीटीआई-भाषा' को मिली शिकायत की एक प्रति में कहा गया है कि उन्हें उनकी 'धार्मिक पहचान' के कारण परेशान किया जा रहा था. वहीं दूसरी तरफ़ विश्वविद्यालय के वरिष्ठ अधिकारियों ने लापरवाही या मनमानी के आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया.
एएमयू ने बृहस्पतिवार को जारी एक बयान में कहा कि उसने प्रोफेसर रचना कौशल द्वारा उठाए गए मुद्दों का 'गंभीरता से संज्ञान' लिया है और सभी शिकायतों पर विश्वविद्यालय के नियमों और कानूनों के अनुसार निष्पक्ष और सख्ती से कार्रवाई की जा रही है. राजनीति विज्ञान विभाग के प्रमुख प्रोफेसर नफीस अहमद अंसारी अभी शहर से बाहर हैं. वापस लौटने पर वह आरोपों का जवाब देंगे.
उन्होंने कहा, "लगता है कि इस मामले में कुछ गलतफहमी हुई है. उसे मेरे लौटने पर सुलझाया जाएगा."