अलीगढ़ नगर निगम द्वारा संपत्ति कर बकाया वसूली को लेकर की गई एक सीलिंग कार्रवाई इन दिनों शहर में चर्चा का विषय बनी हुई है. मामला सिर्फ टैक्स वसूली तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इससे एक परिवार के बच्चों की पढ़ाई और प्रशासनिक संवेदनशीलता पर भी सवाल खड़े हो गए हैं. सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो और तस्वीरों ने इस पूरे घटनाक्रम को लेकर नगर निगम पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए कार्रवाई की मांग की है वहीं नगर निगम के अधिकारी एक गेट पर सीलिंग की कार्रवाई का हवाला देते हुए खुद को बेकसूर बता रहे हैं. दरअसल, पूरा मामला अलीगढ़ शहर के ऊपरकोट इलाके का है, यहां नगर निगम की टीम ने बकाया संपत्ति कर (टैक्स) का हवाला देते हुए मकान को सील कर दिया. आरोप है कि इस कार्रवाई के दौरान घर के अंदर परिवार के सदस्य और छोटे बच्चे मौजूद थे. जो सीलिंग के दौरान अंदर बन्द हो गए.
सोशल मीडिया पर वायरल हुआ वीडियो
सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में देखा गया कि एक बच्चा स्कूल यूनिफॉर्म पहने हुए बाहर नहीं निकल पा रहा है, जिससे लोगों में नाराजगी फैल गई. वायरल वीडियो में बच्चे की बेबसी और परिवार की परेशानी को प्रमुखता से दिखाया गया, जिसने आमजन की भावनाओं को झकझोर दिया. बताया जा रहा है कि संबंधित मकान पर करीब 94 हजार रुपये का संपत्ति कर बकाया था.
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[/tw] नगर निगम के अनुसार, कई बार नोटिस और चेतावनी देने के बावजूद कर जमा नहीं किया गया, जिसके बाद मजबूरन सीलिंग की कार्रवाई करनी पड़ी. निगम अधिकारियों का कहना है कि यह प्रक्रिया नियमों के तहत की गई और किसी को भी घर में बंद करने का इरादा नहीं था.
भवन स्वामी ने कार्रवाई पर उठाए सवाल
हालांकि, भवन स्वामी और स्थानीय लोगों का दावा इससे बिल्कुल अलग है. उनका कहना है कि निगम ने अचानक कार्रवाई करते हुए गेट पर सील लगा दी, जिससे परिवार बाहर नहीं निकल सका. बच्चों को स्कूल भेजने, काम पर जाने और रोजमर्रा की जरूरतों में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा. सबसे अधिक चिंता का विषय यह रहा कि एक नाबालिग बच्चा, जो पढ़ाई के लिए तैयार था, सीलिंग के कारण स्कूल नहीं जा सका. स्थानीय पार्षद भी इस कार्रवाई के विरोध में सामने आए. उनका कहना है कि जिस मकान को सील किया गया, वह पूरी तरह आवासीय है, लेकिन निगम के रिकॉर्ड में उसे व्यावसायिक श्रेणी में दर्शाया गया है. इसी कारण कर की राशि असामान्य रूप से अधिक हो गई. पार्षद के अनुसार, भवन स्वामी ने पहले भी आपत्ति दर्ज कराई थी, लेकिन उस पर गंभीरता से विचार नहीं किया गया. मामले ने तब और तूल पकड़ लिया जब सोशल मीडिया पर वीडियो तेजी से फैलने लगे. वीडियो में बच्चे की स्कूल ड्रेस, बंद गेट और परिवार की परेशानी साफ देखी जा सकती है. इसके बाद आम नागरिकों ने सवाल उठाए कि क्या टैक्स वसूली के नाम पर मानवीय पहलुओं को नजरअंदाज किया जा सकता है. कई लोगों ने प्रशासन से अपील की कि ऐसे मामलों में विशेष संवेदनशीलता बरती जाए, खासकर जब बच्चों और महिलाओं की बात हो.
नगर निगम ने दी सफाई
नगर निगम अधिकारियों में सहायक नगर आयुक्त वीर सिंह ने सफाई देते हुए कहा कि जिस गेट पर सील लगाई गई थी, वह मुख्य प्रवेश द्वार नहीं था. उनके अनुसार भवन में दो गेट हैं—एक से आम आवाजाही होती है और दूसरा गैराज अथवा पुराने कारखाने से जुड़ा है. सीलिंग उसी दूसरे गेट पर की गई थी. अधिकारियों का यह भी कहना है कि परिवार को बाहर आने-जाने से नहीं रोका गया था और सोशल मीडिया पर फैलाई जा रही बातें भ्रामक हैं.