अलीगढ़ में यूजीसी एक्ट 2026 के विरोध में गुरुवार को अलीगढ़ जिला मुख्यालय पर विभिन्न संगठनों के नेतृत्व में बड़ी संख्या में लोगों ने एकजुट होकर प्रदर्शन किया. प्रदर्शनकारी सेंटर प्वाइंट चौराहे पर एकत्रित हुए और वहां से जुलूस के रूप में जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचे. प्रदर्शन के दौरान प्रदर्शनकारियों ने यूजीसी एक्ट 2026 को वापस लेने की मांग करते हुए जमकर नारेबाजी की और राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपा.

Continues below advertisement

इस प्रदर्शन का नेतृत्व दिल्ली हाईकोर्ट से आए अधिवक्ता नीरज शर्मा ने किया. प्रदर्शनकारियों ने कहा कि देश लोकतांत्रिक संविधान के आधार पर चलता है और संविधान सभी नागरिकों को समान अवसर एवं अधिकार प्रदान करता है. उनके अनुसार वर्तमान आरक्षण व्यवस्था और उच्च शिक्षा से संबंधित प्रस्तावित नीतियों को लेकर समाज के एक वर्ग में गंभीर असंतोष है.

आर्थिक आधार पर आरक्षण की मांग

ज्ञापन में सबसे प्रमुख मांग आरक्षण व्यवस्था के आधार में बदलाव से जुड़ी रही. प्रदर्शनकारियों ने कहा कि आरक्षण का आधार केवल जाति न होकर आर्थिक स्थिति को भी प्रमुख आधार बनाया जाना चाहिए. उनका कहना है कि विशेष अवसरों का लाभ वास्तविक रूप से आर्थिक रूप से कमजोर और जरूरतमंद लोगों तक पहुंचना चाहिए. 

Continues below advertisement

'बे-सिर-पैर की बातें..', राहुल गांधी पर FIR पर नैनीताल पुलिस का बयान  

प्रदर्शनकारियों के मुताबिक देश में ऐसे अनेक परिवार हैं जो आर्थिक रूप से कमजोर हैं और शिक्षा तथा रोजगार के अवसरों के लिए सहायता की आवश्यकता रखते हैं. ऐसे परिवारों को उनकी आर्थिक स्थिति के आधार पर आगे बढ़ने का अवसर मिलना चाहिए. उन्होंने सरकार से आरक्षण व्यवस्था की व्यापक समीक्षा करने की मांग की.

नीरज शर्मा ने कहा कि किसी भी वर्ग को केवल जातिगत पहचान के आधार पर पीढ़ी दर पीढ़ी आरक्षण का लाभ नहीं मिलना चाहिए. आरक्षण का वास्तविक उद्देश्य उन परिवारों तक अवसर पहुंचाना होना चाहिए, जो आज भी सामाजिक और आर्थिक रूप से पिछड़े तथा वंचित हैं. उनका कहना है कि आरक्षण का लाभ पाने वाले सक्षम परिवारों और वास्तविक रूप से जरूरतमंद परिवारों के बीच अंतर करने के लिए प्रभावी व्यवस्था विकसित की जानी चाहिए, ताकि सीमित अवसर अधिक से अधिक जरूरतमंद लोगों तक पहुंच सकें.

सभी आरक्षित वर्गों में क्रीमी लेयर हो लागू 

प्रदर्शनकारियों ने कहा कि क्रीमी लेयर का प्रावधान सभी आरक्षित वर्गों में लागू किया जाना चाहिए, जिसमें अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति भी शामिल हों. आरक्षण का लाभ आर्थिक और सामाजिक रूप से सक्षम परिवारों तक सीमित न रहकर उन लोगों तक पहुंचे, जिन्हें वास्तव में इसकी जरूरत है. इसके लिए सरकार को आरक्षण व्यवस्था में ऐसी व्यवस्था करनी चाहिए, जिससे जरूरतमंद परिवारों को प्राथमिकता मिल सके. 

प्रदर्शनकारियों ने कहा कि एक परिवार को आरक्षण का लाभ सीमित रूप से केवल एक बार दिए जाने की व्यवस्था पर विचार किया जाना चाहिए. उनका कहना है कि इससे आरक्षण के अवसर अधिक परिवारों तक पहुंचाए जा सकेगा. एक ही परिवार लगातार कई पीढ़ियों तक आरक्षण के अवसरों का लाभ उठाता है, तो अन्य जरूरतमंद परिवार पीछे रह सकते हैं. 

कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेसवे की रिटेनिंग वॉल धंसी, बारिश में खुली पोल