Gilahraj Hanuman Mandir Aligarh: ताला, तालीम के अलावा अलीगढ़ की पहचान धार्मिक स्थलों के रूप में भी की जाती है. बस स्टैंड से महज एक किलोमीटर दूर अचल ताल में स्थित गिलहराज मंदिर की विशेषताएं हैं. कहा जाता है कि देश का एकमात्र मंदिर हैं जहां गिलहरी के रूप में हनुमान जी विराजमान हैं. गिलहराज हनुमान मंदिर का इतिहास काफी प्राचीन बताया जाता है. मंदिर निर्माण की पुष्टि आज तक कोई नहीं कर पाया.  कहा जाता है कि श्री महेंद्रनाथ योगी महाराज के सपने में हनुमान जी आए थे. उन्होंने अचल ताल में निवास करने की जानकारी दी थी.

गिलहरी के रूप में विराजमान भगवान हनुमान 

सपने में हनुमान जी का दर्शन करने के बाद श्री महेंद्रनाथ योगी महाराज अपने शिष्य को खोज करने के लिए कहा. गुरु के कहने पर शिष्य हनुमान जी की मूर्ति ढूंढने लगे. शिष्य को एक जगह पर झुंड में गिलहरियां निकलीं. जगह की खुदाई करने पर हनुमान जी की गिलहरी स्वरूप में मूर्ति मिली. शिष्य ने गुरु को जानकारी दी. महेंद्रनाथ योगी महाराज अचल ताल आ गए. उन्होंने उसी स्थान पर एक मंदिर की स्थापना की. जिसको आज भी गिलहराज मंदिर के नाम से जाना जाता है.

देश के एकमात्र मंदिर की जानिए विशेषताएं

हनुमान जी के लाखों मंदिर देश के कोने-कोने में स्थित हैं. हर एक मंदिर का अपना-अपना महत्व है. मान्यताओं के अनुसार, हनुमान जी इकलौते भगवान हैं जो अभी भी जीवित हैं. इसी वजह से भक्तों की कामना जल्द पूरी करते हैं. मान्यताओं के अनुसार, भगवान श्री कृष्ण के भाई बलदाऊ ने भी अचल ताल आकर भगवान हनुमान के इस स्वरूप की पूजा की थी. इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि मंदिर काफी प्राचीन है. बताया जाता है देश का एकमात्र मंदिर है जहां पर भगवान हनुमान गिलहरी के रूप में आज भी जीवित हैं. गिलहराज हनुमान मंदिर की प्रसिद्धि दूर-दूर तक है. मान्यता है कि मंदिर का दर्शन मात्र से भक्तों की मनोकामना पूरी होती है. 

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