समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने बुधवार को बीजेपी सरकार पर संवैधानिक आरक्षण प्रणाली को कमजोर करने का आरोप लगाया. उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि लोगों को संविधान के तहत गारंटीकृत अधिकारों को सुरक्षित करने के लिए अदालतों का दरवाजा खटखटाने के लिए मजबूर किया जा रहा है.

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सपा चीफ ने पार्टी मुख्यालय में एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए,‘आरक्षण की लूट’ से संबंधित ‘पीडीए ऑडिट’ नामक एक दस्तावेज जारी किया और कहा कि रिपोर्ट को अधिक डेटा और तथ्यों के साथ अपडेट किया जाता रहेगा. उन्होंने कहा, ‘‘पीडीए ऑडिट और आरक्षण की लूट पर इस दस्तावेज में सुधार जारी रहेगा और इसमें अधिक डेटा शामिल किया जाएगा.’’

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जून 2023 में अखिलेश यादव ने गढ़ा था PDA शब्द

दरअसल, अखिलेश यादव ने जून 2023 में ‘पीडीए’ शब्द गढ़ा था जिसका उनके अनुसार अभिप्राय है ‘‘पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक’’. सपा प्रमुख ने सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) पर निशाना साधते हुए कहा कि अगर छात्रों और अभ्यर्थियों को संवैधानिक प्रावधानों को लागू करने के लिए अदालतों का दरवाजा खटखटाना पड़ता है, तो “यह समझा जाना चाहिए कि सरकार पक्षपाती है.”

'संवैधानिक अधिकारों के लिए अदालतों का दरवाजा...'

उन्होंने आरोप लगाया, ‘‘अगर हमें संवैधानिक अधिकारों के लिए अदालतों का दरवाजा खटखटाना पड़ता है, तो इसका अभिप्राय है कि सरकार पक्षपाती है. और जो पक्षपाती है वह बेवफा भी है. पूर्वाग्रह अपने आप में अन्याय है क्योंकि यह अधिकार छीन लेता है.’’

सपा अध्यक्ष ने आरक्षण को सामाजिक न्याय और समानता का जरिया बताया. उन्होंने कहा, ‘‘आरक्षण सुरक्षा है. आरक्षण सामाजिक समन्वय का एक उपकरण और माध्यम भी है.’’

'अगर बीजेपी सरकार बुलडोजर चलाना चाहती है तो...'

बीजेपी सरकार की बुलडोजर कार्रवाई का जिक्र करते हुए यादव ने कहा, ‘‘अगर बीजेपी सरकार बुलडोजर चलाना चाहती है, तो उन्हें असमानता की असमान जमीन को समतल करने और सभी को उनका उचित आरक्षण प्रदान करने के लिए उपयोग करना चाहिए.’’

लेटरल एंट्री का जिक्र कर क्या बोले अखिलेश यादव?

सपा अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि लेटरल एंट्री नियुक्तियों जैसे तंत्रों के माध्यम से आरक्षण को कमजोर करने का प्रयास किया जा रहा है. उन्होंने दावा किया, ‘‘लेटरल एंट्री के जरिए अपनी पसंद के लोगों को पिछले दरवाजे से समायोजित किया जा रहा है ताकि आरक्षण की मांग धीरे-धीरे कमजोर हो जाए.’’

‘लेटरल एंट्री’ से तात्पर्य सरकार के बाहर से व्यक्तियों को सीधे मध्य-स्तर और वरिष्ठ स्तर के पदों पर नियुक्त करने की प्रक्रिया से है. उन्होंने बीजेपी पर संवैधानिक आरक्षण को लेकर ‘‘बेईमानी’’ में शामिल होने का भी आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि सत्तारूढ़ दल समाज के वंचित वर्गों के लिए समान अवसर नहीं चाहता है.

आरक्षण दान नहीं, एक अधिकार है- सपा चीफ

सपा प्रमुख ने कहा, ‘‘आरक्षण दान नहीं है, यह एक अधिकार है.’’ उन्होंने कहा कि सामाजिक और राजनीतिक प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने और लोकतंत्र की रक्षा के लिए आरक्षण आवश्यक है.

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