उत्तर प्रदेश के गौतमबुद्ध नगर जिले में श्रमिकों का आंदोलन हिंसक हो गया और सरकारी वाहनों, इमारतों, सड़कों पर भारी नुकसान हुआ. सैलरी बढ़ाने की मांग को लेकर सड़कों पर उतरे कर्मचारियों ने हाथों में पत्थर उठा लिए, आगजनी की और पुलिस पर भी पथराव किया. सोमवार, 13 अप्रैल को पूरा दिन नोएडा में हाई अलर्ट रहा और भारी पुलिस बल की तैनाती के बाद स्थिति नियंत्रण में आ सकी. इस बीच योगी आदित्यनाथ सरकार में मंत्री ने इस आंदोलन को साजिश करार देते हुए विपक्ष का हाथ होने का दावा कर दिया.
सीएम योगी के मंत्री के इस बयान पर समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव भड़क गए हैं. सपा चीफ और कन्नौज सांसद अखिलेश यादव ने कहा, "यह सरकार का खुद कराया हुआ आंदोलन है. सरकार ने खुद मजदूरों की नहीं सुनी. अगर यह बात है कि यह आंदोलन विपक्ष की साजिश है, तो फिर इनकी इंटेलिजेंस कहां थी?"
'अगर जानकारी नहीं थी, तो फेलियर है सरकार'- अखिलेश यादव
इतना ही नहीं, अखिलेश यादव ने आगे कहा कि नोएडा कोई सामान्य जगह नहीं है. यह दिल्ली के करीब सबसे प्रतिष्ठित जगह है. जिस नोएडा को लेकर पीएम, सीएम न जाने क्या क्या कहते थे. आखिरकार नोएडा में इस आंदोलन को होने किसने दिया? सरकार ने ही होने दिया क्योंकि सरकार ने कोई सुनवाई नहीं की और अगर आंदोलन के आसार की जानकारी सरकार को ही नहीं थी, तो फिर यह बिल्कुल फेलियर सरकार है.
'क्या बंगाल चुनाव में लगी है यूपी की इंटेलिजेंस?'- अखिलेश यादव
अखिलेश यादव ने आगे कहा, "यूपी सरकार झूठ बोलने में नंबर-1 है. सीएम और सरकार को इस बात की जानकारी रही होगी कि वहां कई दिन से मजदूर अपनी मांगों को लेकर लगातार प्रदर्शन कर रहे थे. अब मुख्यमंत्री कह रहे हैं कि इसमें बहुत बड़ी साजिश है. सवाल यह है कि अगर यह साजिश है तो उनकी इंटेलिजेंस कहां चली गई थी? क्या यूपी की इंटेलिजेंस भी उन्हीं के साथ बंगाल में प्रचार करने चली गई थी? ये अपनी नाकामी छुपाने के लिए इसे साजिश का नाम दे रहे हैं."
सीएम योगी पर हमला बोलते हुए अखिलेश यादव ने कहा, "मुख्यमंत्री जब नोएडा पर इतना ध्यान देते हैं. अगर आप केवल बड़े लोगों के लिए काम करेंगे तो स्वाभाविक है कि इस महंगाई में मजदूर अपनी मांग लेकर सामने आएंगे. अगर बगल के प्रदेश में मांगें मान ली गई हैं तो आपके प्रदेश में क्यों नहीं मांगी जा रही हैं?"
पहले क्यों नहीं बनाई गई समिति?
सपा मुखिया ने यह भी सवाल किया कि मजदूरों से बातचीत के लिए जो समिति बनाई गई है, वह पहले भी तो बनाई जा सकती थी, क्यों नहीं बनाई गई? उन्होंने कहा कि यह सरकार अन्याय करने में नंबर एक है. अन्याय न हो, मजदूरों की बात सुने जाए. अगर मजदूरों की बात नहीं सुनी जाएगी और कल निवेश की बात आएगी तो यही मजदूर हैं जो कारखाने और उद्योग चलाएंगे.
