उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर विधानसभा चुनाव से पहले पीडीए को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं. बड़ी खबर सामने आ रही है कि सीएम योगी आदित्यनाथ पीएम मोदी के GYAN से PDA की काट खोजने में लगे हैं. इसके संकेत खुद सीएम योगी ने मीडिया संवाद कार्यक्रम में दिए.

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एनडीए के 12 साल पूरे होने के मौके पर यह मीडिया संवाद आयोजित किया गया था. इस दौरान सीएम योगी ने पीएम मोदी के GYAN फॉर्मूला का जिक्र किया. दरअसल GYAN फॉर्मूला में गरीब, युवा, अन्नदाता और नारी शामिल है. वहीं पीडीए में पिछड़ा, दलित और आदिवासी शामिल है. सीएम योगी ने इन चार वर्गों को चार अलग-अलग जातियों में बांट दिया है.

माना जा रहा है सीएम योगी की यह रणनीति अखिलेश यादव जाति वाले पीडीए को फेल करने की कोशिश है. लेकिन 2024 के लोकसभा चुनाव में अखिलेश यादव के पीडीए फॉर्मूले ने बीजेपी को शिकस्त दे दी थी. ऐसे में कयास लगाए जा रहे हैं कि क्या लोकसभा के बाद अखिलेश यादव विधानसभा में भी पीडीए का जलवा दिखा पाएंगे. 

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पीडीए को लेकर क्या बोले एक्सपर्ट?

पॉलिटिकल एक्सपर्ट्स योगेश मिश्रा का इस पर कहना है, "पीडीए को लेकर के बेचैनी बीजेपी की बिल्कुल जेनुइन है और किसी भी पॉलिटिकल पार्टी की होनी चाहिए. जब बीते लोकसभा चुनाव में नरेंद्र मोदी सबके सामने थे. उस समय अखिलेश यादव के पीडीए ने करिश्मा कर दिखाया और अब तक का अपनी पॉलिटिकल पार्टी का हाईएस्ट स्कोर खड़ा कर दिया. 

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उन्होंने आगे बताया कि इसी के साथ नरेंद्र मोदी वाली भारतीय जनता पार्टी का सबसे लोएस्ट स्कोर ला के खड़ा कर दिया. तो बेचैनी होना लाजमी है. बीजेपी का भय ये है कि जब नरेंद्र मोदी के सामने पीडीए बहुत तेज चल गया तो योगी के सामने क्या कहीं उससे तेज तो नहीं चल जाएगा?

साफ है कि 2024 में बीजेपी को अखिलेश यादव के पीडीए दांव से जो झटका लगा वो अब तक उसे भूली नहीं है. अब उसी पीडीए का खतरा 2027 में भी उसके सामने खड़ा है. इसलिए बीजेपी ने अपना पूरा फोकस पीडीए दांव की काट लगा दिया है.

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