केंद्र सरकार आज लोकसभा में लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026 पेश करने जा रही है, जिस पर समाजवादी पार्टी के मुखिया और कन्नौज लोकसभा सीट से सांसद अखिलेश यादव ने प्रतिक्रिया दी है. मीडिया से बातचीत अखिलेश यादव ने आरोप लगाया है कि अभी सरकार कई जगहों पर छात्रों और युवाओं के खिलाफ़ केस दर्ज कर रही है.
समाजवादी पार्टी के मुखिया व पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने कहा, "अभी सरकार कई जगहों पर छात्रों और युवाओं के खिलाफ़ केस दर्ज कर रही है. सरकार को चेतना को चुनौती नहीं देनी चाहिए, चेतना सरकार के लिए एक चुनौती बन गई है. सभी राजनीतिक दलों के नेता साथ बैठकर तय करेंगे कि आगे क्या करना है."
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केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह सदन पटल पर रखेंगे बिल का प्रस्ताव
दरअसल, केंद्र सरकार सोमवार (27 जुलाई) को लोकसभा में सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक 2026 पेश करेगी. केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह इस बिल का अनुमति प्रस्ताव सदन के पटल पर रखेंगे. इस बिल का मकसद NEET-UG 2026 परीक्षा में बड़े पैमाने पर हुई गड़बड़ियों के बाद लागू करने में आ रही कमियों को दूर करना, खास न्यायिक तंत्र बनाना और आपराधिक मुकदमों में तेजी लाना है.
सरकार को क्यों उठाना पड़ा ये कदम?
आपको बता दें कि, नीट पेपर लीक के बाद दिल्ली के जंतर मंतर में छात्रों के प्रदर्शन और मानसून सत्र ठप हो जाने के बाद सरकार ने यह कदमा उठाया है. विपक्षी दलों और छात्र संगठनों ने पेपर लीक के मुद्दे पर लगातार केंद्र सरकार पर प्रेशर बनाए रखा था. इस कानून का उद्देश्य जांच-न्यायिक कार्यवाही दोनों के लिए सख्त समय सीमा तय करके मूल 2024 के ढांचे में बड़े बदलाव करना है.
राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों के पास होंगे विशेष अधिकार
बता दें कि, आज लोकसभा में पेश होने वाले 'पब्लिक एग्जामिनेशन (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन बिल, 2026' में राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रशासन को सेशन कोर्ट को स्पेशल फास्ट ट्रैक कोर्ट के तौर पर नामित करने का अधिकार दिया जाएगा.
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