समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने शुक्रवार को किसी का नाम लिए बिना कहा कि अयोध्या की किसी की रिकॉर्ड-तोड़ यात्राओं की पड़ताल के लिए भी एक एसआईटी (विशेष जांच दल) का गठन होना चाहिए.

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सपा प्रमुख ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की शुक्रवार (19 जून) की अयोध्या की यात्रा के बीच ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘एक एसआईटी, किसी की रिकॉर्ड तोड़ ‘अयोध्या’ यात्राओं की पड़ताल के लिए भी बनानी चाहिए.’’

आदित्यनाथ द्वारा अयोध्या में एक सार्वजनिक सभा को संबोधित करने के कुछ घंटे बाद एक तीखी पोस्ट में, यादव ने पूछा कि मुख्यमंत्री के भाषण में ‘‘बयानों से अधिक धमकियां’’ क्यों थीं और सवाल किया कि क्या शुक्रवार के कार्यक्रम की योजना अचानक बनाई गई थी या उस दिन, जिस दिन विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया गया था.

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बयान में भाषण कम, धमकी अधिक क्यों- अखिलेश

यादव ने शाम को एक्स पर पोस्ट किया, ‘‘आज के भाषण में बयान कम, धमकी अधिक क्यों थी? आज का कार्यक्रम अचानक बना था या जिस दिन एसआईटी बनी थी, उस दिन?सूत्र ये क्यों कह रहे हैं कि स्थानीय भाजपा विधायकों और पदाधिकारियों के कहने पर ये कार्यक्रम अचानक तय किया गया, जिससे कि भाजपा की राजनीतिक ज़मीन बचाई जा सके नहीं तो अयोध्या मंडल ही नहीं, पूरे उप्र में भाजपा का सूपड़ा साफ़ होना तय है.’’

एसआईटी के काम को प्रभावित करने की न की जाए कोशिश

पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा, ‘‘भौतिक रूप से भ्रमण कर, उस एसआईटी के काम को प्रभावित करने की कोशिश न की जाए, जो पहले से ही विवादास्पद सदस्यों और कलंकित छवि के कारण शंकाओं के घेरे में है. आज वहां चेहरा उतरा हुआ क्यों था? आवाज़ को तो जानबूझकर ऊंची करने का प्रयास पूरा था लेकिन आत्मविश्वास शून्य क्यों था? इस बार अपने ख़ास लोगों से मिले क्यों नहीं?’’

यादव ने तंज कसते हुए कहा कि जनता कह रही है ‘दूध का दूध, पानी का पानी’ नहीं ‘सोने का सोना, चांदी की चांदी’ करें. उन्होंने कहा कि चढ़ाए गये पैसों, अनमोल शिलाओं के अलावा बहुमूल्य धातुओं और जेवरों का भी हिसाब देना ही पड़ेगा.

दान राशि के गबन के आरोपों की SIT कर रही जांच

उल्लेखनीय है कि 13 जून को, उत्तर प्रदेश सरकार ने मंदिर में दान राशि के गबन के आरोपों की जांच के लिए श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र के अनुरोध के बाद तीन सदस्यीय एसआईटी का गठन किया. जांच का आदेश तब दिया गया था जब सात जून को यादव ने उन रिपोर्टों का हवाला दिया था जिनमें आरोप लगाया गया था कि राम मंदिर में दान के रूप में दिए गए करोड़ों रुपये गायब हैं और अदालतों से मामले का संज्ञान लेने का आग्रह किया था.

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