प्रकाश के पर्व दिवाली ने प्रयागराज की फिजांओं को इस बार खुशियों के साथ धुएं से भी भर दिया. रातभर आतिशबाज़ी के बाद शहर का वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) सामान्य सीमा से कई गुना ऊपर पहुँच गया. दिवाली की रात का जश्न बीतते-बीतते हवा इतनी दूषित हो गई कि वह “बहुत खराब” से “गंभीर” श्रेणी में दर्ज की गई.
सेंसर रिपोर्ट ने दिखाई चिंताजनक तस्वीर
उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की लाइव मॉनिटरिंग मशीनों ने दिवाली की रात शहर के कई इलाकों में AQI 400 से पार दिखाया. कुछ स्थानों पर तो यह स्तर 500 के करीब जा पहुँचा, जो “खतरनाक” श्रेणी में गिना जाता है. PM2.5 और PM10 जैसे सूक्ष्म कणों की सांद्रता सामान्य मानक से कई गुना ज़्यादा पाई गई.
पटाखों के धुएं से बिगड़ी हवा की रफ़्तार
विशेषज्ञों का कहना है कि दिवाली के दौरान जलाए गए पटाखे हवा में जहरीले रासायनिक तत्व घोल देते हैं. पहले से मौजूद धूल और वाहनों के धुएँ के साथ मिलकर यह मिश्रण प्रदूषण को तीन गुना तक बढ़ा देता है. परिणामस्वरूप हवा भारी और दमघोंटू हो जाती है, जिससे सांस लेने में कठिनाई बढ़ जाती है.
स्वास्थ्य पर पड़ रहा सीधा असर
शहर के अस्पतालों में दिवाली के बाद सांस की तकलीफ़, खांसी और गले में जलन की शिकायतें बढ़ गई हैं. डॉक्टरों का कहना है कि पटाखों से निकलने वाले ज़हरीले गैस कण फेफड़ों की गहराई तक पहुंचकर अस्थमा और ब्रोंकाइटिस जैसे रोगों को बढ़ा रहे हैं. बच्चों, बुज़ुर्गों और COPD मरीजों के लिए यह स्थिति बेहद जोखिमपूर्ण बनी हुई है.
चिकित्सकों की चेतावनी और सलाह
स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने लोगों को सुबह के समय बाहर निकलने से बचने, घर के अंदर एयर प्यूरिफ़ायर या गीले कपड़े का उपयोग करने और पानी का सेवन अधिक करने की सलाह दी है. साथ ही तेज आवाज़ वाले पटाखों से कान और आँखों को नुकसान पहुंचने की आशंका भी जताई गई है. उन्होंने अपील की है कि प्रदूषण से बचाव के लिए लोग जागरूक रहें और उत्सव को जिम्मेदारी से मनाएँ.