Tomato Price Hike: बाजार में इन दिनों टमाटरों ने किचन का स्वाद खराब कर दिया है. टमाटर के दाम इन दिनों आसमान छू रहे हैं. बाजार में टमाटर के भाव ने शतक लगा दिया है तो वहीं दूसरी सब्जियां भी अब आंखें दिखाने लग गई हैं. घर में रोजाना बनने वाले तोरी, टिंडे जैसी सब्जियों के दाम भी 50-60 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गए हैं. महंगाई की इस मार ने लोगों का जीना मुहाल कर दिया है. इसी को लेकर जब एबीपी गंगा के संवाददाता उबैदुर्रहमान ने सीधे किसानों से बात की तो उन्होंने बताया कि बारिश की वजह से फसलों को काफी नुकसान हुआ है. जिसकी वजह से सब्जियों के दाम आसमान पर पहुंच गए हैं. 

एबीपी के संवाददाता मुरादाबाद में सीधे किसानों के खेतों पर पहुंचे और उनसे टमाटर व दूसरी सब्जियों की कीमतों में आई तेजी की वजह जानने की कोशिश की. मुरादाबाद में टमाटर, लौकी, तुरई जैसी सब्जियों की खेती करने वाले किसान अनिल सैनी, कमला देवी और ममता ने बताया कि बरसात की वजह से खेतों में कीड़ा लग गया है, जिसकी वजह से टमाटर की फ़सल तो पूरी तरह बर्बाद हो गयी है. लौकी और तुरई में भी कड़े पैदा होने से फूल और फल ख़राब हो रहा है, जिससे सब्जियों का उत्पादन घट गया है.

बरसात की वजह से बर्बाद हुई फसल

एक तरफ जहां सब्जियां खेतों में खराब हो गई है तो वहीं अब किसानों की लागत भी नहीं निकल पा रही है. कीड़ों को मारने के लिए कैमिकल भी छिड़का लेकिन उसका भी कोई फायदा नहीं हुआ. किसान अनिल सैनी ने कहा, वो बारिश की वजह से बर्बाद हुई टमाटर की फसल को देख कर दुःखी हैं. टमाटर की पूरी फसल बर्बाद हो गई है. कुछ दिन पहले जो टमाटर 2 रुपये किलो भी नहीं बिक पा रहा था, अब वही टमाटर बाजार में 100 रुपए किलो बिक रहा है, फसल बर्बाद होने की वजह से खेत में टमाटर बहुत कम बचे हैं. 

बिचौलिए उठा रहे हैं महंगाई का फायदा

किसानों का कहना है कि अगर टमाटर के भंडारण के लिए कोल्ड स्टोर की व्यवस्था उपलब्ध कराई जाए तो किसान टमाटर का सुरक्षित भंडारण कर सकता है. जिससे ऐसी महंगाई से बचा जा सकता है, लेकिन बिचौलिए और बड़े व्यापारी सस्ते में टमाटर खरीद कर अपने यहां भंडारण कर लेते हैं और बाजार में उसे महंगे दामों पर बेच रहे हैं. इस मंहगाई से किसान को कोई फायदा नहीं हो पाता है क्योंकि उसकी फसल तो सस्ते में बिक गयी और जो बची थी उसे बरसात ने बर्बाद कर दिया और आम आदमी को 100 रुपये किलो टमाटर खरीदने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है. 

दूसरी सब्जियों पर भी चढ़ा महंगाई का बुखार

यही हाल तुरई, बैगन और लौकी जैसी सब्जियों का भी है. बारिश होने से फसल बर्बाद हो रही है और सब्जियों के दाम 40 से 60 रुपये किलो तक जा पहुंचे हैं, ऐसे में पूरा मुनाफा बिचौलियों और बड़े व्यापारियों को ही होता है. जो अपने भंडारण को रोक कर बाजार में काला बाज़ारी करते हैं और मुनाफा कमाते हैं. खेतों में काम करने वाले किसानों को इस महंगाई का कोई फायदा नहीं मिल पा रहा है. इन किसानो का कहना है कि सरकार को सब्जियों का सुरक्षित भंडारण करने के लिए कोल्ड स्टोर बनवाने चाहिए ताकि सब्जियों का भंडारण किया जा सके और बिचौलियों से बचा जा सके. 

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