Waqf Properties In Rajasthan: वक्फ कानून में संशोधन पर सोमवार (5 मई) सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई टाल दी गई. इस बीच राजस्थान के बोर्ड ने राज्य में अपनी संपत्तियों की सूची तैयार की है. सूची के मुताबिक राजस्थान में वक्फ की 19044 संपत्तियां हैं. इनकी अनुमानित कीमत अरबों में हैं. 

हालांकि वक्फ की कुछ पर दूसरों का कब्जा है. कुछ के मामले अदालतों में है. कई का किराया बाजारू कीमत के मुकाबले दस फीसदी से भी कम है. बहरहाल राजस्थान वक्फ बोर्ड के चेयरमैन डा. खानू खान बुधवाली भी कानून में बदलाव के खिलाफ हैं. बोर्ड से जुड़े हुए कई लोगों ने कानून में बदलाव के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका भी दाखिल की है. 

वक्फ कानून में संसद में हुए बदलाव के बीच राजस्थान के वक्फ बोर्ड ने राज्य में अपनी संपत्तियों को लेकर जो लिस्ट तैयार की है, उसकी कॉपी एक्सक्लूसिव तौर पर एबीपी न्यूज के पास है. इस लिस्ट के मुताबिक मौजूदा समय में राजस्थान में वक्फ बोर्ड के पास जो 19044 संपत्तियां हैं, उनमें से 17415 गजेटेड है और 1629 को गजट के बाद दर्ज किया गया है. वक्फ बोर्ड के रिकॉर्ड के मुताबिक 5057 नई संपत्तियां सर्वेक्षण के दौरान मौके पर पाई गई. राजस्थान में 186 वक्फ प्रॉपर्टीज बतौर अलल औलाद रजिस्टर्ड है. यानी उनके केयरटेकर हमेशा वक्फ करने वालों के परिवार के लोग ही रहेंगे. 

इतने मामले हाईकोर्ट का स्टेएक्सक्लूसिव जानकारी के मुताबिक राजस्थान में वक्फ बोर्ड के पास जो संपत्तिया हैं, उनमें से सात मामलों में हाईकोर्ट ने स्टे कर रखा है. एक मामला वक्फ अधिकरण जयपुर में पेंडिंग है. 17 मामले एसडीएम स्तर के अधिकारियों की कोर्ट में कब्ज हासिल करने को लेकर पेंडिंग है. अतिक्रमण हटाने के 17 मामले तहसीलदारों के यहां लंबित है, जबकि 10 मामलों में अतिक्रमण से कब्जा पाना बाकी है. 

राजस्थान वक्फ बोर्ड के चेयरमैन डा. खानू खान बुधवाली के मुताबिक राज्य में वक्फ संपत्तियों के मैनेजमेंट के लिए 292 कमेटियां गठित की गई है. इनमें से 177 की सालाना आमदनी एक लाख रुपये से ज्यादा है. राजस्थान में वक्फ संपत्तियों की संख्या भले ही हजारों में हो, लेकिन साल 2022-23 में यहां सिर्फ 79 और 2023-24 में 54 वक्फ प्रॉपर्टी का ही अकाउंट ऑडिट किया गया था. 

कितनी आमदनी कितना खर्च?एबीपी न्यूज के पास मौजूद रिकॉर्ड के मुताबिक राजस्थान वक्फ बोर्ड की सालाना आमदनी साल 2020-21 में 2.22 करोड़ थी जबकि खर्च 4.20 करोड़ रुपये हुए थे. साल 2021-22 में आमदनी घटकर 1.45 करोड़ रुपये रह गई जबकि खर्च 3.52 करोड़ रुपये हुए थे. साल 2022-23 में 3.10 करोड़ की आमदनी हुई जबकि खर्च 4.00 रुपये हुए. साल 2023 24 में 3.23 करोड़ की आमदनी हुई जबकि खर्च घटकर 3.35 करोड़ रुपये किए गए. 

बीते वित्तीय वर्ष के शुरुआती 9 महीनो में 2.11 करोड़ रुपये की आमदनी हुई जबकि खर्च 2.61 करोड़ रुपये किए गए. साल 2020-21 और 2021-22 में राज्य सरकार ने ढाई ढाई करोड़ रुपये का अनुदान भी दिया था. राजस्थान के मौजूदा वक्फ बोर्ड का गठन 31 दिसंबर 2021 को किया गया था. इसके चेयरमैन डा. खानू खान बुधवाली हैं. बोर्ड में सदस्यों की संख्या 9 है जबकि इसका कार्यकाल पांच सालों का है.

'सियासी फायदे के लिए बदलाव कर रही सरकार'राजस्थान वक्फ बोर्ड के चेयरमैन डा. खानू खान बुधवाली के मुताबिक वक्फ कानून को लेकर सरकार की मंशा ठीक नहीं है. सरकार सिर्फ सियासी फायदे के लिए इसमें बदलाव कर रही है. बदलाव से आम मुसलमानो को काफी नुकसान होने की आशंका है. मौजूदा सरकार ने हर साल मिलने वाले अनुदान को भी बंद कर दिया है. वक्फ बोर्ड को और मजबूत व प्रभावशाली बनाए जाने की जरूरत थी, ताकि इसका फायदा आम लोगों तक पहुंच सके, लेकिन सरकार इसे कमजोर करने में लगी हुई है. 

'हमारे हक में आएगा फैसला'उन्होंने बताया कि राजस्थान वक्फ बोर्ड से जुड़े हुए कुछ लोग कानून में बदलाव के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट गए हुए हैं. उन्हें अदालत पर पूरा भरोसा है और इस बात का भी यकीन है कि अदालत का फैसला उनके हक में ही आएगा.