विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के नए नियमों को लेकर शुरू हुआ विवाद अब राजस्थान की गलियों से लेकर सत्ता के गलियारों तक गरमाता जा रहा है. हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में इन नियमों के क्रियान्वयन पर अंतरिम रोक लगाकर स्थिति को संभालने की कोशिश की है, लेकिन राजस्थान का स्वर्ण समाज इस फैसले से रत्ती भर भी संतुष्ट नहीं है. श्री परशुराम सेना ने कोर्ट के इस आदेश को अपर्याप्त बताते हुए सीधे तौर पर सरकार की मंशा पर सवाल खड़े कर दिए हैं.

Continues below advertisement

श्री परशुराम सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष दिनेश रणवा ने जयपुर में मीडिया से बात करते हुए सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर निराशा जताई. उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा, "कोर्ट की यह रोक केवल एक 'झुनझुना' है, जिससे समाज को बहलाने की कोशिश की जा रही है." रणवा ने तर्क दिया कि न्यायिक रोक अस्थायी होती है, जो रोक आज लगी है, वह कल हट भी सकती है. स्वर्ण समाज की स्पष्ट मांग है कि सरकार को इस संवेदनशील मामले में सीधे दखल देना चाहिए और यूजीसी के इन विवादित नियमों को स्थायी रूप से वापस लेने का राजपत्र (Gazette) जारी करना चाहिए.

सरकार की नीयत पर अविश्वास और उग्र आंदोलन की चेतावनी

रणवा ने आरोप लगाया कि उन्हें सरकार की नीयत पर कतई भरोसा नहीं है. उन्होंने कहा कि जब तक सरकार लिखित रूप में अपना फैसला वापस नहीं लेती, तब तक स्वर्ण समाज का आंदोलन धरातल पर जारी रहेगा. आंदोलन की अगली रणनीति साझा करते हुए उन्होंने बताया कि 1 फरवरी 2026 को राजस्थान के सभी जिला और तहसील मुख्यालयों पर संगठन द्वारा विशाल प्रदर्शन किया जाएगा.

Continues below advertisement

स्वर्ण संगठनों की एकजुटता और आगामी रणनीति

परशुराम सेना के अनुसार, इस लड़ाई में स्वर्ण समाज के कई अन्य संगठन भी शामिल हो रहे हैं, जिससे यह एक बड़े जन-आंदोलन का रूप ले रहा है. दिनेश रणवा ने चेतावनी दी कि यदि 1 फरवरी के प्रदर्शन के बाद भी सरकार की नींद नहीं टूटी, तो प्रदेश भर में उग्र आंदोलन किया जाएगा, जिसकी समस्त जिम्मेदारी शासन और प्रशासन की होगी. समाज का मानना है कि ये नियम उनके शैक्षणिक और सामाजिक हितों के विरुद्ध हैं, जिसे किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाएगा.