Udaipur News: झीलों की नगरी उदयपुर में विकास कार्यों के प्रस्ताव को पास करने और उन पर चर्चा करने के लिए नगर निगम उदयपुर की बोर्ड बैठक हुई. बोर्ड बैठक के शुरू होने के कुछ देर बाद ही हंगामा भी शुरू हो गया. हंगामा इतना बढ़ गया कि पार्षद अपनी सीटों से उठे और एक दूसरे को कोसने लगे. यहां कि मेयर जीएस टांक ने अपने इस्तीफ़े की पेशकश भी रख दी. बाद में बैठक को स्थगित करना पड़ गया. इसके बाद दोनों पक्षों के नेता एक दूसरे पर आरोप लगाते हुए दिखाई दिए. 

दरअसल, नगर निगम में बीजेपी के बोर्ड को तीन साल पूरे हो हुए, जिसपर बोर्ड की प्री-बैठक का आयोजन किया गया. इस बैठक में पास कराने के लिए मुद्दों को रखा जाना था. मुद्दे तो भटक गए और आरोप प्रत्यारोप की भेंट बैठक चढ़ गई. 

बीजेपी की अंतःकलह और कांग्रेस फिर टूटीसभी जिला स्तर पर पार्टियां आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारी कर रही हैं, लेकिन उदयपुर की बात करें तो निचले स्तर पर बीजेपी हो या कांग्रेस दोनों में फाड़ दिखाई दे रही है. नगर निगम की बैठक में भी कुछ ऐसा ही हुआ. बीजेपी में जो अंदरूनी कलह थी, वह निगम की बैठक में खुलकर सामने आई. यही नहीं, कांग्रेस एक बार फिर से टूट गई, क्योंकि कांग्रेस पार्षद संजय भगतानी बीजेपी में शामिल हो गए. इस वजह से बैठक में गद्दार के नारे लगने लगे. 

बड़ी बात तो तब हो गई जब मेयर जीएस टांक ने यह कह दिया कि वह काम करने वाला आदमी हैं. खूब नौकरी कर ली, अब मेयर नहीं रहना, किसी और को बना दो. इसपर शहर विधायक और विधानसभा नेता प्रतिपक्ष गुलाब चंद कटारिया ने भी कह दिया कि पार्टी कभी भी किसी को रिप्लेस कर सकती है. 

हंगामे से जनता को होता है नुकसानहंगामे के बाद उपमहापौर पारस सिंघवी मीडिया के सामने आए और कहा कि बोर्ड बैठक जनता के कामों के लिए होती है कि शहर में विकास किए जाएं. इस बैठक में भी सफाई, वाहन सहित अन्य विकास कार्यों पर चर्चा करनी थी, लेकिन कुछ कांग्रेस के विधायकों में हंगामा खड़ा कर दिया. वह भी मुद्दों की बातों पर नहीं, बल्कि बेवजह. बात सफाई की हो रही और हंगामा किसी और बात पर शुरू हो गया. वहीं कांग्रेस के विधायकों ने भी विकास कार्य नहीं करने पर बीजेपी को घेरा.

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