Sirohi News: स्वरूपगंज स्कूल की जर्जर इमारत ने खोली विभाग की पोल, बच्चों की सुरक्षा पर बड़ा सवाल
Sirohi News In Hindi: स्वरूपगंज राजकीय स्कूल में निरीक्षण के दौरान जर्जर भवन की हालत उजागर हुई. छत से प्लास्टर गिर रहा है, सरिए जंग खा चुके हैं और बच्चों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं.

सिरोही में पिण्डवाड़ा तहसील के स्वरूपगंज स्थित राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय में बुधवार (25 फरवरी) को उस समय हड़कंप मच गया जब सिरोही विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव अचानक निरीक्षण के लिए पहुंच गईं. स्कूल की हालत देखकर हर कोई हैरान रह गया. कई कमरों की छतों से प्लास्टर झड़ चुका है, सरिए बाहर दिख रहे थे और दीवारों में नमी साफ नजर आ रही थी. बच्चों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं.
निरीक्षण के दौरान सामने आया कि स्कूल के अधिकांश कक्ष बैठने लायक नहीं हैं. कई कमरों में छत का प्लास्टर टूटकर नीचे गिर चुका है. कुछ जगहों पर तो सरिए तक बाहर आ गए हैं और उनमें जंग लग चुकी है. बारिश के दिनों में हालात और खराब हो जाते हैं, क्योंकि छत से पानी टपकता है.
स्थानीय लोगों का कहना है कि बच्चे डर के माहौल में पढ़ाई करने को मजबूर हैं. किसी भी समय बड़ा हादसा हो सकता है, लेकिन अब तक जिम्मेदार अधिकारियों ने गंभीरता नहीं दिखाई. अभिभावकों में भी इस स्थिति को लेकर नाराजगी है.
अधिकारियों से मौके पर ही जवाब-तलब
स्कूल की हालत देखकर विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव ने मौके पर मौजूद जिम्मेदार अधिकारियों को तुरंत तलब किया. उन्होंने सख्त लहजे में पूछा कि आखिर इतने समय से भवन की ऐसी हालत क्यों बनी हुई है. पूरे मामले की विस्तृत रिपोर्ट तत्काल पेश करने के निर्देश दिए गए.
निरीक्षण के दौरान बच्चों की सुरक्षा को सबसे बड़ी प्राथमिकता बताते हुए कहा गया कि किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी. अधिकारियों को असुरक्षित कमरों को तुरंत चिन्हित कर वैकल्पिक व्यवस्था करने के निर्देश दिए गए.
पहले हादसों से भी नहीं सीखा सबक
प्रदेश में पहले भी जर्जर स्कूल भवनों के कारण हादसे हो चुके हैं. इसके बावजूद सिरोही शिक्षा विभाग की कार्यशैली पर सवाल उठ रहे हैं. निरीक्षण से पहले तक विभाग की ओर से न तो प्रभावी मॉनिटरिंग की गई और न ही समय पर मरम्मत करवाई गई.
लोगों का कहना है कि जब तक कोई बड़ा अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचता, तब तक विभाग हरकत में नहीं आता. इस मामले में भी सचिव के निरीक्षण के बाद ही अधिकारी सक्रिय दिखाई दिए.
12 लाख खर्च का दावा, फिर भी बदहाल स्कूल
अधिकारियों का कहना है कि पिछले साल स्कूल भवन की मरम्मत पर करीब 12 लाख रुपये खर्च किए गए थे. लेकिन जमीन पर हालात कुछ और ही कहानी बयां कर रहे हैं. अगर इतनी बड़ी राशि खर्च हुई, तो फिर भवन की हालत इतनी खराब कैसे हो गई?
मरम्मत कार्य की गुणवत्ता और पारदर्शिता पर अब सवाल उठने लगे हैं. लोगों का कहना है कि क्या मरम्मत सिर्फ कागजों में ही दिखाई गई? अगर काम हुआ, तो उसकी गुणवत्ता इतनी कमजोर क्यों रही?
निरीक्षण के दौरान एडीपीसी कांतिलाल आर्य से भी मीडिया ने सख्त सवाल किए. बच्चों की सुरक्षा से जुड़े इस मामले में जिम्मेदारी तय करने की बात सामने आई है. अधिकारियों को साफ निर्देश दिए गए हैं कि असुरक्षित कमरों में बच्चों को बैठाने से बचें और तुरंत वैकल्पिक इंतजाम करें.
रमसा निर्माण पर भी उठे सवाल
बताया जा रहा है कि विद्यालय भवन का निर्माण रमसा योजना के तहत किया गया था. अब निर्माण की गुणवत्ता पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं. अगर निर्माण मानकों के अनुसार हुआ था, तो भवन इतनी जल्दी जर्जर कैसे हो गया?
विशेषज्ञों का मानना है कि समय-समय पर गुणवत्ता जांच और नियमित रखरखाव जरूरी होता है. अगर यह सब ठीक से किया जाता, तो शायद आज यह स्थिति नहीं बनती.
शिक्षा मंत्री के कदम पर टिकी निगाहें
मामला सीधे बच्चों की सुरक्षा और भविष्य से जुड़ा है. ऐसे में प्रदेश के शिक्षा मंत्री मदन दिलावर की भूमिका अहम मानी जा रही है. क्षेत्र के लोग और अभिभावक उच्च स्तरीय जांच की मांग कर रहे हैं ताकि दोषियों की जिम्मेदारी तय हो सके और सख्त कार्रवाई हो.
फिलहाल अभिभावकों और स्थानीय लोगों की नजर सरकार के अगले कदम पर टिकी है. अगर समय रहते ठोस कार्रवाई नहीं हुई, तो यह लापरवाही कभी भी बड़े हादसे का कारण बन सकती है.
Source: IOCL

























