Sirohi News: फर्जी जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र मामले में जिला परिषद का एक्शन, 8 कर्मी सस्पेंड, हड़कंप
Sirohi News In Hindi: सिरोही में फर्जी जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र जारी करने के मामले में 8 कार्मिक निलंबित किए गए हैं. इन्होंने ग्राम पंचायतों में कार्यकाल के दौरान बिना जांच किए प्रमाण पत्र जारी किए थे.

सिरोही जिले में फर्जी जन्म एवं मृत्यु प्रमाण पत्र जारी करने के मामले में जिला परिषद ने बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई करते हुए 8 कार्मियों को निलंबित कर दिया है. यह कार्रवाई जिला कलक्टर सिरोही के पत्र के अनुसरण में उप निदेशक, आर्थिक एवं सांख्यिकी विभाग द्वारा प्रस्तुत तथ्यात्मक रिपोर्ट के आधार पर की गई. आदेश जिला परिषद, सिरोही के मुख्य कार्यकारी अधिकारी की ओर से जारी किए गए हैं. मामले को लेकर प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया है.
तथ्यात्मक रिपोर्ट के बाद कार्रवाई
जारी आदेश के अनुसार संबंधित ग्राम विकास अधिकारियों एवं एक कनिष्ठ सहायक पर आरोप है कि उन्होंने ग्राम पंचायतों में अपने कार्यकाल के दौरान जन्म-मृत्यु अधिनियम के प्रावधानों की अवहेलना करते हुए बिना समुचित जांच और सत्यापन के जन्म एवं मृत्यु प्रमाण पत्र जारी किए. रिपोर्ट में इसे विधि विरुद्ध और फर्जी प्रमाण पत्र जारी करने की श्रेणी में माना गया है.
प्रशासन ने इसे राजस्थान सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियम 1958 के नियम 13 के तहत गंभीर लापरवाही मानते हुए तत्काल प्रभाव से निलंबन की कार्रवाई की है. निलंबन अवधि में इन सभी का मुख्यालय पंचायत समिति रेवदर निर्धारित किया गया है तथा नियमानुसार निर्वाह भत्ता देय होगा.
इन कार्मिकों पर गिरी गाज
कार्रवाई के दायरे में ग्राम विकास अधिकारी बाबूलाल सैनी, गौरव कुमार बारोट, नितिन कुमार शर्मा, अशोक कुमार, राधेश्याम सैनी, धर्मेंद्र मिश्रा और प्रभुराम मीणा शामिल हैं. इनके अलावा श्रीमती मोनिका, कनिष्ठ सहायक को भी निलंबित किया गया है.
ये सभी कार्मिक सिरोही जिले की विभिन्न ग्राम पंचायतों, विशेष रूप से पंचायत समिति आबूरोड क्षेत्र की ग्राम पंचायतों में पदस्थापित रहे हैं. आदेश में स्पष्ट किया गया है कि संबंधित पंचायतों में जारी हुए जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्रों की विस्तृत जांच के दौरान अनियमितताएं सामने आईं.
एफआईआर दर्ज कराने के निर्देश
जिला परिषद ने संबंधित विकास अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि निलंबित कार्मिकों के ऑनलाइन भुगतान संबंधी आईडी तत्काल प्रभाव से निष्क्रिय या बंद की जाए. साथ ही जिन ग्राम पंचायतों में ये पदस्थ थे, वहां का कार्यभार अन्य ग्राम विकास अधिकारियों को सौंपने के आदेश भी दिए गए हैं.
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि आदेश में संबंधित ग्राम विकास अधिकारी और कनिष्ठ सहायक के साथ-साथ मामले में शामिल ई-मित्र संचालकों एवं अन्य अनधिकृत व्यक्तियों के खिलाफ भी नियमानुसार पुलिस थाने में एफआईआर दर्ज कराने के निर्देश दिए गए हैं. इससे संकेत मिल रहे हैं कि मामला केवल विभागीय कार्रवाई तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि आपराधिक जांच भी आगे बढ़ सकती है.
प्रशासनिक सख्ती का संदेश
इस कार्रवाई को जिला प्रशासन की सख्त कार्यशैली के रूप में देखा जा रहा है. जन्म और मृत्यु प्रमाण पत्र जैसे संवेदनशील दस्तावेजों में गड़बड़ी को प्रशासन ने गंभीरता से लिया है. माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में इस मामले में और भी खुलासे हो सकते हैं.
साथ ही अन्य जिम्मेदार कार्मिकों पर भी कार्रवाई की तलवार लटक सकती है. जिले में इस कार्रवाई के बाद पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के कर्मचारियों में हलचल है, वहीं आमजन इसे पारदर्शिता और जवाबदेही की दिशा में बड़ा कदम मान रहे हैं.
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Source: IOCL

























