राजस्थान की राजनीति में इन दिनों सचिन पायलट सियासत का केंद्र बने हुए हैं. पक्ष हो या विपक्ष सभी के बयान पायलट के इर्द गिर्द नजर घूम रहे हैं.  पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत पिछले कई दिनों से 'मानेसर कांड' का ज़िक्र कर रहे हैं, तो वहीं अब बीजेपी प्रदेश प्रभारी राधा मोहन दास ने सचिन पायलट को ‘बहरूपिया’ बताया है और कहा उनकी एक टांग कांग्रेस में तो एक टांग पता नहीं कहां रहती है. ऐसे में सवाल ये है कि आखिर क्यों पायलट विरोधियों के साथ-साथ अपनों के भी निशाने पर है.

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 बीजेपी प्रदेश प्रभारी ने पायलट को बहरूपिया बताया और कहा कि उनकी एक टांग कांग्रेस में और एक टांग पता नहीं कहां रहती है. इसके जवाब में गहलोत ने कहा, 'उनकी दोनों टांगे कांग्रेस में है और कांग्रेस में रहेगी. अब उनको (BJP) को भटके आ रहे हैं पहले गुमराह करके ले गए मानेसर के अंदर हमारे लोगों को.'

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गहलोत ने कहा- पायलट हमें छोड़ने की गलती नहीं करेंगे

मीडिया से बातचीत में गहलोत ने सचिन पायलट का नाम लेकर कहा कि पायलट समझ गए हैं और पार्टी छोड़ने की गलती नहीं करेंगे. उन्होंने कहा, "सचिन पायलटको अनुभव हो गया है इस प्रकार की गलती करने के क्या अंजाम होते हैं. ठीक है ना? इसलिए अब वो समझ गए हैं, संभल गए हैं, समझ भी गए, संभल भी गए हैं और मैं उम्मीद करता हूं अब वो हमें छोड़ के कभी नहीं जाएंगे और हमारी पूरी पार्टी एकजुट है उनके साथ में."

पायलट के बढ़ते राजनीतिक कद से घबराए नेता?

गौर हो कि इन दिनों सचिन पायलट पाँच राज्यों में हो रहे चुनाव में व्यस्त हैं. वे केरलम् से लेकर असम तक चुनावी प्रचार करते दिखाई दे हे हैं. पार्टी आलाकमान ने उन्हें केरलम् जैसे राज्य में बड़ी ज़िम्मेदारी देते हुए ‘सीनियर ऑब्ज़र्वर ’ बनाकर भेजा है. खास बात तो ये है कि पायलट की सभाओं में भारी भीड़ और युवाओं का जोश साफ़ नज़र आता है. इससे राष्ट्रीय राजनीति में पायलट का कद नई ऊंचाइयों की ओर बढ़ रहा है. ऐसे में पायलट के बढ़ते राजनीतिक कद से पार्टी के भीतर नेताओं में असहजता बढ़ने लगी है. 

एक ओर जहां पायलट देश भर में चुनावी प्रचार में जुटे हैं, तो दूसरी तरफ पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत लगातार 'मानेसर कांड' का ज़िक्र कर रहे हैं. राजनीतिक पंडितों का मानना है कि 20 दिनों के भीतर तीन बार मानेसर कांड का ज़िक्र करना कोई आम बात नहीं हो सकती, इसके पीछे बड़ी सियासत छुपी है.

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