राजस्थान के जयपुर में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले ने कहा कि सेवा का उद्देश्य केवल जरूरतमंदों तक सुविधाएं पहुंचाना नहीं, बल्कि उनमें स्वाभिमान, आत्मसामर्थ्य और पुरुषार्थ की भावना जगाना भी है. सेवा ऐसी होनी चाहिए कि आज सेवा लेने वाले हाथ कल सेवा देने वाले बनें. उन्होंने समाज के समर्थ लोगों से सेवा बस्तियों में जाकर प्रत्यक्ष सहभागिता बढ़ाने और आत्मीय संबंध स्थापित करने का आह्वान किया.

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होसबाले सोमवार को सेवा भारती जयपुर इकाई के वार्षिकोत्सव को मुख्य वक्ता के रूप में संबोधित कर रहे थे. उन्होंने कहा कि जयपुर महानगर की 257 सेवा बस्तियों में 379 सेवा कार्य संचालित हैं. इनमें शिक्षा, स्वास्थ्य, स्वावलंबन और सामाजिक गतिविधियों से जुड़े विभिन्न प्रकल्प शामिल हैं. उन्होंने कहा कि इन बस्तियों में काम करते समय केवल सुविधाएं उपलब्ध कराने तक सीमित न रहते हुए लोगों के आत्मविश्वास और स्वाभिमान को मजबूत करने पर भी ध्यान देना चाहिए.

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उन्होंने कहा कि ‘मलिन बस्ती’ के स्थान पर ‘सेवा बस्ती’ शब्द का प्रयोग केवल शब्द परिवर्तन नहीं, बल्कि दृष्टिकोण में बदलाव का प्रतीक है. इन क्षेत्रों को अभाव के केंद्र के रूप में नहीं, बल्कि सेवा और सामाजिक दायित्व के केंद्र के रूप में देखना चाहिए.

आर्थिक सहयोग के साथ प्रत्यक्ष सहभागिता जरूरी

होसबाले ने कहा कि समाज में सेवा कार्यों के लिए आर्थिक सहयोग देने वालों की कमी नहीं है, लेकिन प्रत्यक्ष सहभागिता से सामाजिक अपनत्व और मजबूत होता है. उन्होंने लोगों से सेवा बस्तियों के संस्कार केंद्रों में जाने, बच्चों के साथ समय बिताने तथा जन्मदिन और दीपावली जैसे अवसर उनके बीच मनाने का आग्रह किया.

उन्होंने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति में ईश्वर का वास है और हर व्यक्ति सम्मान एवं आत्मविश्वास के साथ जीवन जीने का अधिकारी है. भगवान राम द्वारा केवट, शबरी और गिलहरी के प्रति अपनाए गए स्नेह का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि समाज के प्रत्येक व्यक्ति की अपनी उपयोगिता और भूमिका है.

भाव ज्यादा महत्वपूर्ण 

होसबाले ने सेवा भारती के कार्यकर्ताओं और सेवानिवृत्त चिकित्सकों के सेवाभाव को प्रेरणादायी बताया. उन्होंने कहा कि सेवा के लिए दूरी नहीं, भाव महत्वपूर्ण है. सेवा के माध्यम से सामाजिक एकात्मता मजबूत करना ही राष्ट्र निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है.

कार्यक्रम में सेवा भारती की वेबसाइट एवं एप तथा ‘भारतीय संस्कृति में सेवा परंपरा’ पुस्तक के विशेषांक का विमोचन किया गया. यशोदा बाल सेवा केंद्र के नवनिर्मित भवन का डिजिटल उद्घाटन भी हुआ.

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