Udaipur News: अयोध्या, राम मंदिर और 22 जनवरी, पूरे देश में हर व्यक्ति के जेहन और जुबान पर है. रामलला प्राण प्रतिष्ठा समारोह के लिए जोरशोर से सभी तैयारियों में जुटे हैं. अयोध्या स्थित राम मंदिर में देशभर से अलग-अलग वस्तुएं पहुंच रही हैं. विशाल और भव्य राम मंदिर के निर्माण में बड़ी संख्या में तराशे हुए पत्थर लगाए जा रहे हैं.
मंदिर निर्माण के लिए एशिया की सबसे बड़ी मार्बल मंडी से ट्राले भर-भर कर दिव्य पत्थर भेजे जा रहे हैं. ये पत्थर मंदिर में कई जगहों पर लगाया जा रहा है. ऐतिहासिक राम मंदिर की भव्यता और दिव्यता को बनाए रखने के सारे कार्य बहुत सुनियोजित ढ़ंग से किया जा रहा है.
राम मंदिर में लग रहे मेवाड़ के पत्थरजिस एशिया की सबसे बड़ी मार्बल मंडी की बात कर रहे हैं- वह उदयपुर और राजसमंद जिले की मंडी है. यहां से बड़ी मात्रा ने मार्बल निर्यात होता है. मेवाड़ के ही पत्थर राम मंदिर में लगाए जा रहे हैं. पत्थर को तराशने वाले मार्बल व्यवसायी आयुष खमेसरा ने बताया कि "यहां से विशाल पत्थर के ब्लॉक्स उदयपुर से भिजवाए जा रहे हैं. यह मेवाड़ के ही पत्थर हैं."
इन जगहों पर लग रहे हैं भव्य पत्थरमार्बल व्यवसायी आयुष खमेसरा ने बताया कि "मेवाड़ के पत्थरों को विशेष आकृतियों और डिजाइन में तराशने के बाद अयोध्या भेज रहे हैं. मंदिर में उनका इस्तेमाल गोखड़ों, तोरण, स्तंभों में किया जाएगा." उन्होंने बताया कि "रामलला के मंदिर के आर्च पर लगने वाले सभी पत्थर यहीं से जा रहे हैं. इसके अलावा मंदिर के चारों तरफ पिलर और ऊपरी भाग के दोनों तरफ भी यहीं के पत्थर का इस्तेमाल किया जा रहा है."
200 से ज्यादा ट्राले भेज चुके हैं अयोध्याराम मंदिर में लगे पत्थरों की सौंदर्यता बढ़ा को लेकर आयुष खमेसरा ने बताया कि पत्थर पर नक्काशी कर अयोध्या भेजने का काम लम्बे समय से चल रहा है. मंदिर में विभिन्न जगह लगाने वाले इन पत्थरों को 200 से ज्यादा ट्रालों में भरकर अयोध्या भेज चुके हैं. अभी भी काम चल रहा है और इससे भी ज्यादा संख्या में अभी भेजा जाना है." उन्होंने बताता कि "पत्थरों को तराशने का काम लगातार चल रहा है."
'दुनिया भर में भेजे जाते हैं तराशे पत्थर'पत्थरों के कारोबार को लेकर उदयपुर मार्बल प्रोसेसर एसोसिएशन अध्यक्षय कपिल सुराणा ने बताया कि "इससे पहले लंबे समय से उदयपुर से देश और दुनिया में कच्चा माल (पत्थर) निर्यात किया जाता रहा है, हालांकि पिछले कुछ सालों में इसमें बदलावा हुआ है. अब मशीनों से पत्थर को तराशने के बाद आगे भेज रहे हैं."
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