Keoladeo National Park Bharatpur: राजस्थान के भरतपुर जिले में स्थित विश्व विख्यात केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान पक्षियों की चहचहाहट से गुलजार रहता है. केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान के लिए प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक राजस्थान जयपुर ने विशेष निर्देश जारी किया.
इस निर्देश के तहत कल यानी गुरुवार (23 मई) की सुबह 8 बजे से वन्यजीवों की वाटर होल पद्धति से संख्या का आंकलन शुरू किया गया है. इस बार वाटर होल के साथ-साथ 50 ट्रैप कैमरों से भी वन्यजीवों की गणना की जाएगी.
25 टीमें करेंगी वन्य जीवों की गणनावन्यजीवों की गणना को देखते हुए केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान में पर्यटकों को प्रवेश नहीं दिया गया है. केवलादेव नेशनल पार्क में गुरुवार की सुबह से शुक्रवार (24 मई) की सुबह 8 बजे तक तक सभी वाटर होल पर 25 टीमें गठित कर बैठाई गई हैं.
इस दौरान 12- 12 घंटे टीमें वाटर होल पर बैठकर जो भी वन्यजीव पानी पीने आएगा उसकी एंट्री करेगी. इस काम के लिए मौके पर 50 ट्रैप कैमरे भी लगाए गए हैं, जिससे दोहरी पद्धति से वन्यजीव की सटीक गणना हो सकेगी. केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान प्रशासन ने पार्क के अंदर 23 वाटर होल निर्धारित किए हैं, प्रत्येक वाटर होल पर दो ट्रैप कैमरे लगाए गए हैं.
ट्रैप कैमरे से भी होगी निगरानीअभी तक ट्रैप कैमरे से टाइगर रिजर्व में ही गणना होती थी, जबकि केवलादेव नेशनल पार्क में पहली बार ट्रैप कैमरे की मदद से वन्यजीवों की गणना की जाएगी. ट्रैप कैमरे के अलावा प्रत्येक वाटर होल पर केवलादेव पार्क के 2-2 कार्मिक, रिक्शा पुलर, गाइड की टीमें बनाकर उनको तैनात किया गया है.
वाटर होल पर जो भी वन्यजीव पानी पीने आएगा, मौके पर मौजूद टीमें उनकी गणना करती रहेंगी. इसके अलावा 4 कैमरे रोड, चौराहा और ट्राई जंक्शन पर लगाए जाएंगे, जिससे जो वन्यजीव वाटर होल पर नहीं आएंगे उनकी गणना ट्रैप कैमरे के जरिये हो जाएगी.
टीमें 12-12 घंटे कर रही हैं निगरनीउपवन संरक्षक मानस दीन्ह ने बताया कि 23 मई की सुबह 8 बजे से केवलादेव नेशनल पार्क में वन्यजीवों की गणना शुरू की गई है, जो आज शुक्रवार (24 मई) सुबह 8 बजे तक चलेगी. केवलादेव नेशनल पार्क में अभी तक सिर्फ ऑक्युलर और आंखों से देखकर ही वन्यजीव की गणना की जाती थी.
हालांकि इस बार वन्यजीवों की गणना के लिए 50 ट्रैप कैमरे भी लगाए गए हैं. पार्क में स्थित प्रमुख जलाशयों और जहां पर वन्यजीव का मूवमेंट होता है, उन जगहों पर भी ट्रैप कैमरे लगाए गए हैं. इसके लिए कुल 50 टीम बनाई गई हैं, जो 12- 12 घंटे लगातार वाटर होल पर बैठकर वन्यजीव की गणना करेंगी.
