Rajasthan: नशा करने वाले स्कूली टीचर्स पर कसेगी नकेल, शिक्षा मंत्री का बड़ा फरमान
Rajasthan News: राजस्थान में सरकार शिक्षकों पर सख्ती की तैयारी में है. नशा करने वालों की अलग-अलग सूची बनाने के निर्देश दिए. फैसले पर शिक्षक संगठनों और विपक्ष ने जताया कड़ा विरोध.

राजस्थान में सरकारी स्कूलों के शिक्षकों को लेकर बड़ा कदम उठाने की तैयारी हो रही है. राज्य के शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि ऐसे शिक्षकों की पहचान की जाए जो किसी भी तरह का नशा करते हैं. इस फैसले के बाद शिक्षा विभाग में हलचल तेज हो गई है, वहीं शिक्षक संगठनों और विपक्ष ने भी इस पर सवाल खड़े कर दिए हैं.
दो तरह की लिस्ट बनाने के निर्देश
शिक्षा मंत्री के अनुसार, शिक्षकों की दो अलग-अलग सूचियां तैयार की जाएंगी. पहली सूची में उन सभी शिक्षकों के नाम होंगे जो पान, सिगरेट, गुटखा, शराब या अन्य किसी नशीले पदार्थ का सेवन करते हैं. दूसरी सूची खास तौर पर उन शिक्षकों की होगी जो स्कूल परिसर में नशा करते हैं या नशा करके पढ़ाने पहुंचते हैं.
मंत्री का मानना है कि शिक्षक समाज का आईना होते हैं और बच्चों के भविष्य को संवारने की जिम्मेदारी उन्हीं पर होती है. ऐसे में उनका आचरण साफ-सुथरा होना चाहिए. हालांकि, इस लिस्ट के तैयार होने के बाद क्या कार्रवाई होगी, इस बारे में फिलहाल कोई साफ जानकारी नहीं दी गई है.
मदन दिलावर ने कहा कि शिक्षक सिर्फ पढ़ाने का काम नहीं करते, बल्कि वे बच्चों के लिए आदर्श भी होते हैं. अगर शिक्षक खुद नशा करेंगे तो उसका गलत असर बच्चों पर पड़ेगा. इसलिए जरूरी है कि शिक्षकों को नशे से दूर रखा जाए और उनकी जवाबदेही तय की जाए.
शिक्षक संगठनों का विरोध तेज
इस फैसले को लेकर शिक्षक संगठनों में भारी नाराजगी है. राजस्थान शिक्षक संघ के संरक्षक सियाराम शर्मा का कहना है कि इस तरह की लिस्ट बनाकर सरकार शिक्षकों की छवि खराब कर रही है. उनका कहना है कि बहुत कम शिक्षक ऐसे हैं जो किसी तरह का नशा करते हैं, और ज्यादातर शिक्षक अपनी जिम्मेदारी ईमानदारी से निभाते हैं.
उनका तर्क है कि अगर कोई शिक्षक स्कूल परिसर में नशा करता है तो उस पर कार्रवाई होनी चाहिए, लेकिन निजी जीवन में क्या करता है, उस पर सरकार को हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए.
'पहले विधायकों और मंत्रियों की लिस्ट बनाओ'
सियाराम शर्मा ने नाराजगी जताते हुए कहा है कि अगर पारदर्शिता की बात है तो सबसे पहले राज्य के मंत्रियों और विधायकों की ऐसी ही सूची बनाई जानी चाहिए. उनका कहना है कि शिक्षक समाज का हिस्सा हैं और सिर्फ उन्हीं को निशाना बनाना ठीक नहीं है. संगठन ने यह भी कहा कि वे इस मांग को लेकर विधानसभा अध्यक्ष को पत्र लिखेंगे और इस मुद्दे को जोर-शोर से उठाएंगे.
विपक्ष ने भी उठाए सवाल
राजस्थान की मुख्य विपक्षी पार्टी कांग्रेस ने भी इस फैसले पर सवाल खड़े किए हैं. कांग्रेस के स्टेट मीडिया कॉर्डिनेटर और महासचिव स्वर्णिम चतुर्वेदी का कहना है कि सरकार को असली मुद्दों पर ध्यान देना चाहिए.
कांग्रेस नेता के मुताबिक, राज्य के कई सरकारी स्कूलों की हालत खराब है, भवन जर्जर हैं और बुनियादी सुविधाओं की कमी है. ऐसे में सरकार को इन समस्याओं को हल करने पर ध्यान देना चाहिए, न कि नए विवाद खड़े करने पर.
पहले भी विवादों में रहे हैं फैसले
यह पहली बार नहीं है जब शिक्षा मंत्री का कोई फैसला विवादों में आया हो. इससे पहले उन्होंने स्कूलों में एडमिशन लेने वाले बच्चों के नाम बदलने को लेकर भी बयान दिया था, जिस पर काफी विवाद हुआ था.लगातार ऐसे फैसलों के कारण विपक्ष और शिक्षक संगठन दोनों ही सरकार की मंशा पर सवाल उठा रहे हैं.
फिलहाल शिक्षा विभाग की ओर से लिस्ट तैयार करने की प्रक्रिया शुरू होने की उम्मीद है. इसके बाद सरकार क्या कार्रवाई करेगी, यह देखना दिलचस्प होगा. लेकिन इतना साफ है कि यह मुद्दा आने वाले दिनों में और ज्यादा गरमा सकता है.
Source: IOCL


























