राजस्थान पुलिस के स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप ने शिक्षक भर्ती परीक्षा में डमी कैंडिडेट बिठाकर कामयाबी हासिल करने वाले एक ऐसे गिरोह का पता लगाया है, जिसे पकड़ना कतई आसान नहीं था. एसओजी ने इसके लिए कई सॉफ्टवेयर का सहारा लिया और करीब पचास लाख तस्वीरों में से इन आरोपियों को ढूंढ निकाला. जिन पांच आरोपियों को पकड़ा गया है, उनमें से तीन एमबीबीएस फाइनल इयर के स्टूडेंट हैं जबकि बाकी दो शिक्षक हैं. एक अन्य संदिग्ध आरोपी को भी हिरासत में लेकर उसे जयपुर लाया जा रहा है.

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राजस्थान की माध्यमिक शिक्षा द्वितीय श्रेणी शिक्षक भर्ती प्रतियोगी परीक्षा-2022 में डमी अभ्यर्थियों के जरिए चयन दिलाने वाले गिरोह तक पहुंचना आसान नहीं था. लेकिन महीनों की मेहनत, तकनीकी जांच और मल्टी-स्टेट ऑपरेशन के बाद स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (एसओजी) ने इस हाई-प्रोफाइल परीक्षा घोटाले का बड़ा खुलासा किया है.

एसओजी ने दबिश देकर 5 डमी परीक्षार्थियों को किया गिरफ्तार

एसओजी ने अंडमान के पोर्ट ब्लेयर से लेकर कोलकाता, जालौर, कोटा और जयपुर तक एक साथ दबिश देकर पांच डमी परीक्षार्थियों को गिरफ्तार किया है. ये सभी 10-10 हजार रुपए के इनामी थे और लंबे समय से एजेंसी की रडार पर चल रहे थे. आरोपियों को पकड़ने के लिए एसओजी की टीमों को अलग-अलग राज्यों में लगातार मूवमेंट करनी पड़ी, संदिग्धों की लोकेशन बदलती रही और पहचान छुपाने के लिए आरोपियों ने कई तरह के तरीके अपनाए.

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एसओजी ने पांच लाख तस्वीरों में से संदिग्धों की पहचान की

जानकारी के अनुसार, जांच की सबसे बड़ी चुनौती थी डमी और असली अभ्यर्थियों की पुख्ता पहचान. इसके लिए एसओजी ने विशेष सॉफ्टवेयर विकसित किया. जिससे परीक्षा के दौरान खींची गई तस्वीरों का डिजिटल मिलान किया गया. फोटो मैचिंग, बायोमेट्रिक डेटा और परीक्षा रिकॉर्ड को क्रॉस-चेक किया गया. एक-एक लिंक जोड़ते हुए एजेंसी असली नेटवर्क तक पहुंची. एसओजी ने करीब पचास लाख तस्वीरों को सॉफ्टवेयर में डालकर उनमें से संदिग्धों की पहचान की है.

एसओजी अधिकारियों के मुताबिक सामान्य ज्ञान एवं शैक्षिक मनोविज्ञान और विज्ञान विषय की परीक्षा में डमी बैठाने का यह खेल पूरी प्लानिंग के साथ खेला गया था. कुछ परीक्षाएं तो प्रश्न पत्र लीक होने के कारण दोबारा भी करानी पड़ी थीं. जिससे जांच और जटिल हो गई. इसके बावजूद एजेंसी ने तकनीकी साक्ष्य और मुखबिर तंत्र के जरिए कड़ियां जोड़ना नहीं छोड़ा.

गिरफ्तार आरोपी में 3 MBBS छात्र और दो सरकारी शिक्षक

गिरफ्तार किए गए आरोपियों में तीन एमबीबीएस छात्र और दो सरकारी शिक्षक शामिल हैं. पूछताछ में सामने आया कि ये आरोपी मूल अभ्यर्थियों की जगह परीक्षा देने के बदले तीन से पांच लाख रुपए तक की रकम लेते थे. सौदे पहले तय होते थे, सेंटर और रोल नंबर तक की जानकारी दी जाती थी और परीक्षा के दिन पूरी सावधानी के साथ डमी बैठाया जाता था.

राजस्थान पुलिस की एसओजी के एडीजी विशाल बंसल के मुताबिक इस प्रकरण में अब तक 12 मूल अभ्यर्थी, 9 डमी परीक्षार्थी और 5 दलाल गिरफ्तार किए जा चुके हैं. एसओजी का दावा है कि यह कार्रवाई सिर्फ गिरफ्तारी नहीं, बल्कि भर्ती परीक्षाओं की विश्वसनीयता पर हमला करने वाले नेटवर्क के खिलाफ एक कड़ा संदेश है. जांच अभी जारी है और एजेंसी को उम्मीद है कि आने वाले दिनों में इस रैकेट की और परतें भी सामने आएंगी.

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