राजस्थान: इंसान जानवरों के प्रति लापरवाह! मंत्री जोराराम बोले- 'जब तक गाय दूध देती है, घर...'
Rajasthan News: जोधपुर में मंत्री जोराराम कुमावत ने कहा कि इंसान गोवंश और डॉग दोनों के प्रति लापरवाह हो गया है. उन्होंने पशु संरक्षण, मोबाइल इलाज यूनिट और डेयरी विकास को लेकर सरकार की योजनाएं बताईं.

राजस्थान के पशुपालन विकास मंत्री जोराराम कुमावत 7 नवंबर को जोधपुर दौरे पर पहुंचे. सर्किट हाउस में मीडिया से बातचीत के दौरान उन्होंने गोवंश की स्थिति, डॉग्स को लेकर सुप्रीम कोर्ट के आदेश और पशुपालन से जुड़ी योजनाओं पर खुलकर बात की. मंत्री ने कहा कि इंसान गोवंश के प्रति जितना लापरवाह है, उतना ही डॉग्स के प्रति भी लापरवाह हो गया है. हमें इनके प्रति दया का भाव रखते हुए संरक्षण और पालन-पोषण की जिम्मेदारी निभानी चाहिए.
मंत्री कुमावत ने कहा कि लोग केवल दुधारू पशुओं को ही घर में रखते हैं, बाकी को सड़क पर छोड़ देते हैं. उन्होंने कहा, “गाय जब तक दूध देती है, तब तक उसे घर में बांधते हैं, और जब दूध देना बंद कर देती है, तो उसे सड़क पर छोड़ दिया जाता है. यह प्रवृत्ति बेहद चिंताजनक है. गाय तो हमारी माता है, उसका दूध, दही, छाछ, गोबर और गोमूत्र सब कुछ उपयोगी है, फिर भी हम उसे मेला और गंदा खाने के लिए छोड़ देते हैं.” मंत्री ने कहा कि यह समय है जब समाज को पशुओं के प्रति अपनी संवेदनशीलता बढ़ानी चाहिए.
‘एक फोन पर इलाज’: 536 मोबाइल यूनिट से घर-घर पहुंच रहा उपचार
मंत्री कुमावत ने बताया कि राजस्थान सरकार ने पशुओं के इलाज के लिए बड़ी पहल की है. उन्होंने कहा कि अब “एक फोन पर पशु का इलाज घर तक पहुंचेगा.” राज्य में 536 मोबाइल वेटनरी यूनिट गाड़ियां शुरू की गई हैं जिनमें डॉक्टर, कंपाउंडर, हेल्पर और दवाइयां मौजूद हैं. ये टीमें ऑन कॉल सेवा के जरिए पशुपालकों के घर जाकर इलाज करती हैं. इसके अलावा 51 नए पॉलीक्लिनिक भी शुरू किए गए हैं और करीब 300 संस्थाएं पशु स्वास्थ्य सेवाओं में सक्रिय हैं. मंत्री ने कहा कि चाहे गाय हो या डॉग, हर पशु का समय पर इलाज सुनिश्चित करना सरकार की प्राथमिकता है.
सीमंस तकनीक और डेयरी विकास से पशुपालन में नई क्रांति
मंत्री कुमावत ने बताया कि राज्य सरकार सीमंस तकनीक के उपयोग से नंदी (बछड़ों) की संख्या कम करने पर काम कर रही है. उन्होंने कहा, “अब सीमंस तकनीक से 90% बछड़ियां और केवल 10% बछड़े पैदा होंगे. इसका फायदा किसानों और गोपालकों को धीरे-धीरे दिखने लगा है.” इसके साथ ही उन्होंने बताया कि पशु बीमा योजना भी शुरू की गई है ताकि पशुपालकों को नुकसान से बचाया जा सके.
डेयरी विकास पर बोलते हुए मंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने 1000 करोड़ रुपये के कोरपस फंड को मंजूरी दी है. इस पहल से डेयरी सेक्टर में 20 साल बाद इतना बड़ा निवेश हो रहा है. इससे सहकारी डेयरियों और लाखों दुग्ध उत्पादकों को लाभ मिलेगा. डेयरी प्रसंस्करण क्षमता 52 लाख लीटर से बढ़ाकर 75 लाख लीटर प्रतिदिन की जाएगी. अलवर, उदयपुर, बांसवाड़ा, भरतपुर और सवाईमाधोपुर में नए डेयरी प्लांट बनेंगे, जबकि जोधपुर, कोटा और अन्य जिलों में मौजूदा प्लांट्स का आधुनिकीकरण किया जाएगा.
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