Lok Sabha Elections 2024: राजस्थान के भरतपुर की लोकसभा सीट पर पूर्व राजपरिवार का दबदबा रहा है. वहीं इस सीट पर बीजेपी ने रामस्वरूप कोली को अपने उम्मीदवार बनाया है. बीजेपी ने दावा किया है कि इस बार पार्टी राजस्थान से लोकसभा की पूरी 25 सीटों पर जीत हासिल करेगी.
अगर भरतपुर सीट की बात करें तो यहां पूर्व राजपरिवार के ही पिता, बेटा, बहू और भतीजी सांसद बन चुके हैं. भरतपुर के पूर्व राजपरिवार के सदस्य और भरतपुर रियासत के अंतिम शासक महाराजा बृजेन्द्र सिंह ने वर्ष 1967 में लोकसभा का चुनाव जीतकर लोकसभा पहुंचे थे.
उसके बाद उनके बेटे विश्वेन्द्र सिंह 1989 में जनता दल के टिकट पर चुनाव लड़ कर सांसद चुने गए थे. वर्ष 1991 में उनकी भतीजी कृष्णेन्द्र कौर दीपा बीजेपी के टिकट पर चुनाव लड़कर सांसद पहुंची थीं. वर्ष 1996 के लोकसभा चुनाव में उनकी पुत्रवधू दिव्या सिंह बीजेपी के टिकट पर चुनाव लड़ कर लोकसभा पहुंची थीं.
भरतपुर लोकसभा सीट अनुसूचित जाती के लिए है आरक्षित
भरतपुर लोकसभा सीट परिसीमन के बाद अनुसूचित जाती के लिए आरक्षित हो गई है. वर्ष 2009 के लोकसभा चुनाव में भरतपुर की लोकसभा सीट पर कांग्रेस के रतन सिंह चुनाव जीत कर सांसद बने थे. लेकिन वर्ष 2014 के चुनाव में बीजेपी ने बहादुर सिंह कोली को टिकट देकर चुनाव मैदान में उतारा था तो कांग्रेस ने डॉ. सुरेश यादव को टिकट दिया था.
वर्ष 2014 में बीजेपी के बहादुर सिंह कोली चुनाव जीतकर सांसद बने थे. वर्ष 2019 के चुनाव में बीजेपी ने फिर कोली जाती पर दांव खेला और रंजीता कोली को टिकट देकर मैदान में उतारा. कांग्रेस पार्टी ने अभिजीत कुमार जाटव को टिकट देकर चुनाव मैदान में उतारा था, लेकिन बीजेपी की रंजीता कोली की जीत हुई थी और अभिजीत कुमार को हार का मुंह देखना पड़ा था.
बीजेपी ने फिर कोली जाती पर ही जताया भरोसा
बीजेपी ने फिर कोली जाति पर एक बार फिर से भरोसा जताया है. बीजेपी ने रंजीता कोली का टिकट काट कर रामस्वरूप कोली को अपना प्रत्याशी बनाया है. अभी कांग्रेस ने अपने प्रत्याशी की घोषणा नहीं की है, लेकिन सूत्रों के अनुसार कांग्रेस भजन लाल जाटव को अपना प्रत्याशी घोषित कर सकती है. भजन लाल जाटव प्रदेश की कांग्रेस सरकार में कैबिनेट मंत्री रह चुके हैं. वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव में भजनलाल जाटव को हार का सामना करना पड़ा था.
भरतपुर सीट पर कब और कौन-कौन जीता
भरपुर लोकसभा सीट पर पहला चुनाव 1952 में हुआ था, जिसमें गिर्राज शरण सिंह निर्दलीय चुनाव लड़े थे और जीत कर सांसद बने थे. वर्ष 1957 और 1962 में कांग्रेस के बाबू राजबहादुर चुनाव जीतकर सांसद बने थे. वर्ष 1967 में पूर्व राजपरिवार के महाराजा बृजेन्द्र सिंह चुनाव लड़े थे.
साल 1971 और 1977 की लोकसभा चुनाव में पंडित रामकिशन भरतपुर की लोकसभा सीट पर जीत कर सांसद बने थे. वर्ष 1980 में भरतपुर लोकसभा सीट पर कांग्रेस पार्टी के राजेश पायलट चुनाव जीतकर सांसद बने थे, तो 1984 कांग्रेस के नटवर सिंह भरतपुर लोकसभा का चुनाव जीतकर सांसद बने थे.
इस तरह साल 1989 में पूर्व राजपरिवार के सदस्य विश्वेन्द्र सिंह जनता दल की टिकट पर चुनाव लड़ कर सांसद बने थे. वर्ष 1991 में बीजेपी ने पूर्व राजपरिवार की सदस्य कृष्णेन्द्र कौर दीपा को टिकट देकर मैदान में उतारा और कृष्णेन्द्र कौर दीपा की जीत हुई. वर्ष 1996 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने दिव्या सिंह को टिकट देकर चुनाव मैदान में भेजा था.
दिव्या सिंह जीतकर सांसद बनीं और वर्ष 1998 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के नटवर सिंह लोकसभा का चुनाव जीतकर सांसद बने थे. वर्ष 1999 और 2004 में लोकसभा के चुनाव में बीजेपी के टिकट पर विश्वेन्द्र सिंह चुनाव लड़े थे और जीतकर सांसद बने थे.
कभी कांग्रेस तो कभी बीजेपी के हाथों में आई सत्ता
वर्ष 2009 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस पार्टी के रतन सिंह चुनाव जीतकर सांसद बने थे. उसके बाद वर्ष 2014 के चुनाव में बीजेपी के बहादुर सिंह कोली चुनाव जीतकर सांसद बने थे. वर्ष 2019 के चुनाव में बीजेपी ने फिर कोली जाती पर दांव खेला और रंजीता कोली को टिकट देकर मैदान में उतारा.
कांग्रेस पार्टी ने अभिजीत कुमार जाटव को टिकट देकर चुनाव मैदान में उतारा था, लेकिन बीजेपी की रंजीता कोली की जीत हुई थी और अभिजीत कुमार को हार का मुंह देखना पड़ा था. अब वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव का टिकट पूर्व सांसद रामस्वरूप कोली को टिकट दिया गया है. कांग्रेस प्रत्याशी की घोषणा होना अभी बाकी है.
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