जोधपुर जिले के कई इलाकों में बुधवार (1 अक्टूबर) सुबह हुई तेज बेमौसम बारिश ने किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं. भोपालगढ़, पीपाड़, बिलाड़ा, मंडोर, ओसियां, तिंवरी, बापिणी, चामू, सेखाला और लोहावट तहसील के असिंचित क्षेत्रों में रखी खरीफ की फसलें बारिश से बुरी तरह प्रभावित हुई हैं.
किसानों ने बताया कि खेतों में कटाई के बाद सूखने के लिए रखी बाजरा, मूंग, मोठ, तिल और ग्वार की बालियां बारिश में भीग गईं. इससे उनका बड़ा हिस्सा खराब हो गया है. भारतीय किसान संघ के सचिव तुलसाराम सिंवर ने कहा, “सबसे ज्यादा नुकसान असिंचित क्षेत्रों में हुआ है. ये किसान पूरी तरह मौसम पर निर्भर रहते हैं. अब कटाई के बाद रखी फसल सड़ने या अंकुरित होने का खतरा बढ़ गया है.”
मंडियों में भी बारिश का कहर
सुबह 11 बजे हुई तेज बरसात ने बिलाड़ा कृषि उपज मंडी का दृश्य भी बदल दिया. मंडी प्रांगण में खुले में रखी उपज बारिश से भीग गई. इस वजह से किसान और व्यापारी दोनों में निराशा दिखाई दी. मंडी परिसर में अनाज बचाने के लिए तिरपाल डालकर उसे सुरक्षित करने की कोशिश की गई.
किसानों का कहना है कि पहले ही लागत अधिक और पैदावार कम होने से उनकी हालत खराब थी. अब ऊपर से मौसम की मार ने उनकी मेहनत पर पानी फेर दिया है. कई किसान डर जताते हैं कि अगर जल्द मुआवजा और राहत नहीं मिली, तो उनकी आर्थिक स्थिति और बिगड़ सकती है.
किसानों की सरकार से मांग
ग्रामीणों ने सरकार से मांग की है कि वे विशेष सर्वे कराकर बेमौसम बारिश से हुए नुकसान का सही आंकलन करें और उचित मुआवजा दिलाएं. तुलसाराम सिंवर ने कहा, “असिंचित क्षेत्रों में किसान पूरी तरह मौसम पर निर्भर हैं. ऐसे में नुकसान का पूरा आंकलन कर मुआवजा देना बेहद जरूरी है.”
किसान और व्यापारी अब सरकार से त्वरित कदम उठाने की उम्मीद कर रहे हैं, ताकि उनकी मेहनत बेकार न जाए और अगली फसल के लिए कुछ राहत मिल सके.