Continues below advertisement

राजस्थान सरकार द्वारा सरकारी अस्पतालों में वितरण की जा रही खांसी के सिरप 'डेक्सट्रोमेथोरफेन HBr SIRUP IP 13.5 MG5ML इन दिनों मरीजों के लिए जानलेवा साबित हो रही है. राजस्थान सरकार की मुफ्त दवा योजना में मिलने वाली खांसी सिरप 'डेक्सट्रोमेथोरफेन HBr SIRUP IP 13.5 MG5ML के सेवन से भरतपुर में एक बच्चे की हालात खराब हो गई और चिकित्सकों ने भी जब उपयोग किया तो उनकी तबियत खराब हो गई है. जानकारी के अनुसार सीकर जिले में भी इसी सिरप के उपयोग से एक बच्चे की मौत हो गई.

बताया गया है की भरतपुर जिले के बयाना ब्लॉक के कलसाड़ा गांव में एक सरकारी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर परिजन एक तीन वर्षीय बच्चे को दिखाने लाये थे. डॉक्टर ने बच्चे को दवाई के साथ खांसी की सिरप पीने को दी. परिजनों ने जब बच्चे को सिरप पिलाया तो तीन वर्षीय बच्चे गगन की तबीयत खराब हो गई.

Continues below advertisement

सिरप पीने के बाद बच्चे को बेहोशी आ गई और उसके दिल की धड़कन बढ़ने लगी. परिजनों द्वारा बच्चे को जयपुर के जेके लोन अस्पताल में भर्ती कराया गया. जहां बच्चे को वेंटिलेटर पर रखने की नौबत आ गई. फिलहाल बच्चे का इलाज जयपुर में चल रहा है.

जयपुर के फोर्टिस अस्पताल में चल रहा है डॉक्टर का इलाज

बच्चे की हालत सीरियस होने पर होने पर परिजनों ने इसकी शिकायत डॉक्टर से की तो सामुदायिक स्वस्थ्य केंद्र के प्रभारी डॉ. ताराचंद योगी ने उस सिरप का खुद ने उपयोग किया और दो अन्य एम्बुलेंस कर्मचारियों को भी पिलाया तो कर्मचारियों को तुरंत उल्टी हो गई और डॉक्टर की तबीयत भी खराब हो गई. डॉक्टर का इलाज भी जयपुर के फोर्टिस अस्पताल में चल रहा है.

सरकार ने सिरप पर लगाई रोक और जांच के दिए आदेश

दूसरी घटना राजस्थान के सीकर जिले में घटित हुई जब सरकारी अस्पताल में मिली इस खांसी सिरप के पीने से 5 वर्षीय बच्चे की मौत हो गई. राज्य सरकार ने जानलेवा खांसी सिरप को बंद कर दिया है और जांच के आदेश दे दिए है. बयाना ब्लॉक के मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ जोगेंद्र गुर्जर ने बताया कि 'डेक्सट्रोमेथोरफेन हाइड्रोब्रोमाइड' सॉल्ट वाली सिरप के एक बैच से समस्या होने की आशंका है. एहतियात के तौर पर इस बैच की आपूर्ति और वितरण पर जिले के सभी सरकारी अस्पतालों में तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी गई है.

जे के लोन अस्पताल में बच्चे का इलाज है जारी

भरतपुर के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी गौरव कपूर ने बताया है की बयाना के कलसाड़ा सीएससी पर एक तीन वर्षीय बच्चा को खांसी - जुकाम की शिकायत होने पर उसके परिजन दिखाने लाये थे. डॉक्टर ने उस बच्चे को डेक्सट्रोमेथोरफेन हाइड्रोब्रोमाइड' सॉल्ट वाली सिरप और एंटी कोल्ड सिरप दिया था. बच्चे कोजब दवाई दी तो उसे बेहोशी के लक्षण होने पर बच्चे को प्राइवेट चिकित्सक के पास ले जाया गया. डॉक्टर ने बच्चे को देखकर कहा बच्चे को वेंटिलेटर पर लेने की आवश्यकता पड़ सकती है, इसे हायर सेंटर ले के जाये तो परिजन बच्चे को जयपुर के जे के लोन अस्पताल लेकर गए जहां बच्चे का इलाज जारी है.

26 तारीख को बच्चे के परिजन डॉक्टर से शिकायत करने पहुंचे तो डॉक्टर ने परिजनों को भरोसा दिलाने के लिए किइस सवाई से ऐसा कुछ नहीं है. डॉक्टर ने 5 एमएल खुद सिरप खुद ने पी लिया और 108 और 104 के दो कर्मचारियों को भी पीला दिया. दोनों कर्मचारियों को थोड़ी देर बाद उल्टी जैसा लगा तो उन्होंने उल्टी कर दी लेकिन उस समय डॉक्टर को कुछ नहीं हुआ.

डॉक्टर अपनी गाड़ी में बेहोशी की हालत में थे पड़े

डॉक्टर जब छुट्टी के बाद अपने घर लिए निकले और उसके बाद घर नहीं पहुंचे तो शाम को लगभग 8 बजे डॉक्टर को देखने निकले तो रास्ते में डॉक्टर अपनी गाड़ी में बेहोशी की हालत में पड़े थे. डॉक्टर को तुरन्त बयाना अस्पताल लाया गया उसके बाद उन्हें भरतपुर रेफर किया गया. भरतपुर में डॉक्टर तारा चंद योगी की तबियत में सुधार हुआ लेकिन थोड़ी परेशानी होने पर उन्हें हायर सेंटर जयपुर के फोर्टिस अस्पताल भेजा गया जहां उनका इलाज जारी है.