राजस्थान के सरकारी अस्पतालों में संविदा पर काम करने वाले नर्सिंग स्टाफ ने अपनी तमाम मांगों को लेकर राजधानी जयपुर में प्रदर्शन किया है. यह प्रदर्शन शहीद स्मारक पर हुआ जिसमें सैंकड़ो की संख्या में नर्सिंग स्टाफ शामिल हुए. यह सभी प्रदर्शनकारी राजस्थान के अलग-अलग हिस्सों से आए हुए थे. 

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प्रदर्शनकारी नर्सिंग स्टाफ ने खुद को नियमित किए जाने, संविदा बनाए जाने पर अनुभव को वरीयता दिए जाने, हर साल बोनस अंक दिए जाने की पुरानी व्यवस्था को बहाल किए जाने और नियमित किए जाने तक मानदेय बढ़ाए जाने की मांग की.

'6 साल से नहीं बढ़ाया मानदेय'

प्रदर्शनकारी नर्सिंग स्टाफ ने कहा कि वह नियमित कर्मचारियों की तरह काम करते हैं, लेकिन फिर भी पिछले 6 सालों से उनका मानदेय नहीं बढ़ाया गया है. वह सिर्फ सात हजार रुपये के मासिक भत्ते पर काम करने के लिए मजबूर हैं. इसे अब वह कतई बर्दाश्त नहीं करेंगे और इसके खिलाफ अपना आंदोलन जारी रखेंगे. 

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'खाली पदों पर संविदाकर्मियों को दी जाए प्राथमिकता'

नर्स भर्ती संघर्ष समिति के बैनर तले हुए इस प्रदर्शन के खाली पड़े पदों पर भर्ती का विज्ञापन जारी किए जाने और संविदा पर काम करने वाले नर्सिंग स्टाफ को प्राथमिकता के आधार पर नौकरी दिए जाने की मांग की गई. यह भी कहा गया कि अगर सरकार ने जल्द ही उनकी मांग नहीं मानी तो वह हड़ताल पर जाने या आंदोलन को तेज करने का फैसला भी ले सकते हैं. 

'हर बार इम्तिहान की व्यवस्था भी खत्म हो'

प्रदर्शनकारियों ने यह भी कहा कि हर साल उनकी संविदा यानी कॉन्ट्रैक्ट बढ़ाए जाने से पहले उनका इम्तिहान लिए जाने की जो व्यवस्था लागू की जा रही है, पूरी तरह गलत है. वह बरसों से काम कर रहे हैं. उनकी उम्र अब अपने बच्चों को पढ़ाने की है ना कि खुद पढ़ाई कर इम्तिहान देने की. राजस्थान में दस हज़ार से ज्यादा नर्सिंग स्टाफ में संविदा पर काम कर रहा है.