राजस्थान में संविदा (Contract) पर काम करने वाले नर्सिंग स्टाफ का गुस्सा सातवें आसमान पर है. अपनी मांगों को लेकर पिछले डेढ़ महीने से चल रहा इनका आंदोलन आज 46वें दिन भी जारी है. इसी कड़ी में आज राजधानी जयपुर में समूचे राजस्थान से आए नर्सिंग कर्मियों ने बड़ा प्रदर्शन किया. प्रदर्शन में बड़ी संख्या में महिला स्टाफ भी शामिल हुईं, जिन्होंने जमकर नारेबाजी करते हुए सरकार से इंसाफ की गुहार लगाई. कर्मचारियों ने सरकार पर वादाखिलाफी का सीधा आरोप लगाते हुए 12 जून को हुए समझौते को तत्काल लागू करने की मांग की है.

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प्रदर्शन कर रहे कर्मचारियों का सबसे बड़ा दर्द उनके वेतन को लेकर है. उनका आरोप है कि उनसे पूरे महीने ड्यूटी ली जाती है, लेकिन भत्ते के रूप में केवल सात हजार रुपये दिए जाते हैं. कर्मचारियों का कहना है कि आज के समय में इतने कम भुगतान पर एक मजदूर भी काम नहीं करता. वे इस उम्मीद में अपनी सेवाएं दे रहे थे कि भविष्य में सरकार उनकी नौकरी नियमित (Permanent) करेगी, लेकिन अब उन्हें धोखा मिला है.

संविदा कर्मचारियों ने बताया 'घोर नाइंसाफी'

कर्मचारियों में इस बात को लेकर भी भारी रोष है कि करीब 2 महीने पहले बड़ी संख्या में संविदा नर्सिंग स्टाफ को नौकरी से हटा दिया गया था. अब सरकार उनकी जगह एक प्राइवेट एजेंसी के जरिए 'आउटसोर्सिंग' (Outsourcing) पर कर्मियों को रख रही है. संविदा कर्मचारियों ने इसे अपने साथ घोर नाइंसाफी बताया है और इस फैसले का कड़ा विरोध कर रहे हैं.

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दीपक के परिवार को अब तक नहीं मिला न्याय

इस आंदोलन के बीच एक बेहद दर्दनाक पहलू भी जुड़ा है. नौकरी से हटाए जाने के बाद डिप्रेशन में आकर संविदा कर्मी दीपक खारवाल ने जहर खाकर खुदकुशी कर ली थी. प्रदर्शनकारियों का कहना है कि दीपक के परिवार वालों को सरकार की तरफ से अभी तक कोई मुआवजा या आर्थिक सहायता नहीं मिली है. न्याय न मिलने और आर्थिक तंगी से परेशान होकर कुछ समय पहले दीपक की पत्नी ने भी जहर खाकर जान देने की कोशिश की थी.

'जब तक मांगें पूरी नहीं, तब तक जारी रहेगा आंदोलन'

आंदोलनकारी कर्मचारियों ने सरकार को खुली चेतावनी दी है. उनका स्पष्ट कहना है कि जब तक हटाए गए कर्मचारियों की बहाली, 12 जून के समझौते को लागू करने और वेतन विसंगतियों जैसी उनकी मांगें पूरी नहीं हो जातीं, तब तक वे अपना प्रदर्शन और आंदोलन इसी तरह जारी रखेंगे.

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