Rajasthan Politics: राजस्थान में उपचुनाव के परिणाम के बाद सियासी समीकरण अब बदल रहा है. यहां पर जिस तरह से बीजेपी को बड़ी जीत मिली है, उसके बाद पार्टी में हलचल है. वहीं, कांग्रेस में फेर बदल की तैयारी हो रही है. कांग्रेस इस उपचुनाव में अपना गढ़ भी नहीं बचा पाई है. इसे लेकर पार्टी में कई नेता अपनी अपनी मांग रख रहें है. उन्हें अपनी-अपनी भागीदारी की चिंता सता रही है. छोटे दलों में भी अपने अपने गढ़ बचा न पाने की चिंता सता रही है. बीजेपी सूत्रों की मानें तो दिसंबर तक जिलों, मंडल और ब्लॉक अध्यक्षों की घोषणा हो सकती है. इसके साथ ही प्रदेश कार्यकारिणी की भी तैयारी शुरू हो जाएगी. वहीं, कांग्रेस में भी बड़े बदलाव के संकेत है. पार्टी अध्यक्ष से लेकर जिला अध्यक्षों तक के बदलने की तैयारी है. कांग्रेस में पिछले कुछ दिनों से बदलाव की मांग उठ रही है. वही, खींवसर में आरएलपी की हार हो गई है. इसके बाद से हनुमान बेनीवाल की पार्टी में भी हलचल तेज है. भारत आदिवासी पार्टी भी सलूम्बर में कम वोटों के अंतर से हार गई है. बीजेपी में चिंतन और मंथन दोनोंलोकसभा चुनाव के बाद बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष की कुर्सी से सीपी जोशी को हटना पड़ा था. उसके बाद मदन राठौड़ को प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया. लेकिन, उसके बाद भी पार्टी में कोई परिवर्तन नहीं किया गया. उपचुनाव में बड़ी जीत मिलने के बाद से बीजेपी में बदलाव की तैयारी है. मगर, उसके लिए चिंतन चल रहा है. इतना ही नहीं पार्टी में मंथन भी है. क्या युवाओं को भी नए संगठन में मौक़ा दिया जाय या जो अभी संगठन में काम कर रहे उन्हें ही आगे बढ़ाया जाए. कुछ ऐसी चर्चा है. कांग्रेस में बदलाव की बयारविधानसभा और लोकसभा चुनाव दोनों कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गोविन्द सिंह डोटासरा के नेतृत्व में लड़ा गया. उसके बाद उपचुनाव में भी डोटासरा को मैदान में उतारा गया है. मगर, अब जब कांग्रेस की करारी हार हुई तो बदलाव की बयार बह चली है. जयपुर से दिल्ली तक बदलाव का माहौल दिख रहा है. दिसम्बर माह में बदलाव दिख सकता है. विधानसभा चुनाव के बाद से प्रदेश कार्यकारिणी में भी कोई बदलाव नहीं हुआ है. अन्य दलों की हालतराजस्थान में बीजेपी-कांग्रेस के अलावा बाप और आरएलपी में भी हलचल तेज है. इन दोनों दलों को भी नुकसान हुआ है. आरएलपी की खींवसर में हार के बाद से विधानसभा में कोई सदस्य नहीं है. अब वहां भी संगठन में बदलाव की बात चल रही है. वहीँ, भारत आदिवासी पार्टी में भी सलूम्बर में हार को लेकर चिंतन तेज है. विधान सभा में बाप के चार विधायक हो गए हैं.
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