राजस्थान बजट 2026-27 विधानसभा में होगा पेश, नौकरी से लेकर टैक्स तक क्या बदलेगा? इन पर होगी निगाहें
Rajasthan Budget 2026: 11 फरवरी को राजस्थान सरकार का वित्त वर्ष 2026-27 का बजट विधानसभा में पेश होगा. बजट से रोजगार, किसान कल्याण और बुनियादी ढांचे पर बड़ी घोषणाओं की उम्मीद है.

राजस्थान सरकार का वित्त वर्ष 2026-27 का सालाना बजट 11 फरवरी को पेश किया जाएगा. उपमुख्यमंत्री व वित्त मंत्री दीया कुमारी सुबह 11 बजे राज्य विधानसभा में लगातार तीसरी बार बजट प्रस्तुत करेंगी. यह बजट सत्र 28 जनवरी से जारी विधानसभा कार्यवाही के बीच आएगा और राज्य की आर्थिक दिशा तय करेगा. बजट के आकार में बीते वर्ष की तुलना में उल्लेखनीय बढ़ोतरी की संभावना जताई जा रही है.
बजट का आकार और राजनीतिक संकेत
तय कार्यक्रम के अनुसार वित्त मंत्री दीया कुमारी द्वारा पेश किए जाने वाले बजट का आकार पिछले वित्त वर्ष 2025-26 के 5.37 लाख करोड़ रुपये से 7 से 10 प्रतिशत तक अधिक हो सकता है. इसे भजनलाल सरकार का तीसरा बजट माना जा रहा है, जिस पर राजनीतिक और सामाजिक दोनों स्तरों पर खास नजर है. बजट को विकासोन्मुख और संतुलित बनाने की तैयारी की जा रही है.
बजट से पहले उपमुख्यमंत्री प्रेम चंद बैरवा ने कहा कि आगामी बजट में समाज के सभी वर्गों का ध्यान रखा जाएगा और यह पूरी तरह समावेशी होगा. वहीं भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ ने विश्वास जताया कि यह बजट युवाओं, किसानों, महिलाओं और आम जनता के हितों को केंद्र में रखेगा. उन्होंने इसे राज्य के समग्र विकास के लिए समर्पित बताया.
जनता की उम्मीदें और संभावित घोषणाएं
सामाजिक कार्यकर्ताओं और आम लोगों को बजट 2026-27 से रोजगार, बुनियादी ढांचे और किसान कल्याण पर ठोस फैसलों की उम्मीद है. संभावित घोषणाओं में करीब 1.50 लाख नई सरकारी नौकरियों का कैलेंडर, किसान सम्मान निधि में बढ़ोतरी, महिलाओं के लिए योजनाओं का विस्तार, नए ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस-वे और मेट्रो परियोजनाएं शामिल हो सकती हैं. पेट्रोल-डीजल पर वैट में कटौती और बिजली बिलों में राहत की भी उम्मीद जताई जा रही है.
नेता प्रतिपक्ष ने भी बजट के आधार पर सरकार को घेरा
वहीं विपक्ष आज पेश होने वाले बजट पर पहले से ही हमलावर है और इसे लुभावने जुमलों और झूठी उम्मीदों का अंबार बता दिया है. नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने सरकार को घेरते हुए कहा कि विज्ञापन और दावों के शोर के बीच धरातल पूरी तरह खाली है. उन्होंने बताया कि पिछले साल की कुल 2717 घोषणाओं में से मात्र 754 पूरे किए गए और 707 घोषणाएं (26.02%) ऐसी हैं जिन्हें सरकार ने दो साल बीतने के बावजूद छुआ तक नहीं है.
Source: IOCL
























