Jodhpur: मौलाना शेर मोहम्मद खान ने रमजान से पहले मुसलमानों से की अपील, बोले- 'लाउडस्पीकर का यूज...'
Ramadan 2026: मौलाना शेर मोहम्मद खान रजवी ने कहा कि रोजा इंसान को आत्मसंयम की शिक्षा देता है और भूख-प्यास का एहसास गरीबों और जरूरतमंदों के दर्द को समझने का माध्यम बनता है.

जोधपुर में मुकद्दस माह ए रमजान की आमद पर आध्यात्मिक इस्लामिक संस्थान दारूल उलूम इस्हाकिया के मुफ्ती ए आजम राजस्थान मौलाना शेर मोहम्मद खान रजवी ने समस्त देशवासियों को दिली मुबारकबाद पेश की है. इस अवसर पर उन्होंने रमजान के पाक महीने में आपसी प्रेम, भाईचारे और इंसानियत को बनाए रखने की विशेष अपील करते हुए मस्जिदों और आमजन से लाउडस्पीकर के सीमित व संयमित उपयोग का आग्रह किया.
'रमजान इबादत और सब्र का महीना'
मौलाना रजवी ने कहा कि रमजान इबादत, सब्र और तक़वा (परहेज़गारी) का महीना है. ऐसे में बिना ज़रूरत तेज़ आवाज़ या शोर-शराबा न किया जाए, क्योंकि इससे सामाजिक सौहार्द प्रभावित हो सकता है. उन्होंने स्पष्ट किया कि रोजा केवल भूख-प्यास से रुकने का नाम नहीं है, बल्कि किसी का दिल न दुखाना भी रोजे की रूह का हिस्सा है.
'लाउडस्पीकर का यूज न करें'
उन्होंने मस्जिदों से अपील की कि अजान के अलावा लाउडस्पीकर का प्रयोग न किया जाए, ताकि रोजेदारों और आम नागरिकों को किसी प्रकार की असुविधा न हो और समाज में आपसी भाईचारा बना रहे.
'रब के करीब लाता है रमजान'
मौलाना रज़वी ने बताया कि इस्लाम में 15 वर्ष की आयु पूरी होने पर रोज़ा फ़र्ज़ हो जाता है. रमजान का महीना इंसान को अपने रब के करीब लाता है और नेकी, सेवा व हमदर्दी की राह पर चलने की प्रेरणा देता है.
'रोजा गरीबों के दर्द के एहसास का नाम'
उन्होंने कहा कि रोजा इंसान को आत्मसंयम की शिक्षा देता है और भूख-प्यास का एहसास गरीबों व ज़रूरतमंदों के दर्द को समझने का माध्यम बनता है, जिससे समाज में सेवा, सहयोग और इंसानियत की भावना मज़बूत होती है. अंत में उन्होंने दुआ की कि ये पवित्र महीना देश में अमन, शांति, भाईचारा और आपसी सौहार्द लेकर आए. बता दें कि मंगलवार (17 फरवरी) को सऊदी अरब में चांद दिखाई दे दिया गया है. वहीं भारत में 19 फरवरी से पहला रोजा रहेगा.
Source: IOCL


























