कोचिंग सिटी कोटा में इन दिनों कमर्शियल एलपीजी गैस सिलेंडरों की भारी किल्लत चर्चा का विषय बनी हुई है. मार्च 2026 में अचानक बढ़े इस संकट का सीधा असर शहर के हजारों हॉस्टल और मेसों पर पड़ रहा है. जहां लाखों कोचिंग छात्र रोजाना भोजन करते हैं. गैस की कमी के चलते कई मेस संचालकों को मजबूरी में लकड़ी और कोयले की भट्टियों पर खाना बनाना पड़ रहा है. जबकि कुछ जगहों पर इंडक्शन चूल्हों का सहारा लिया जा रहा है.
जानकारी के अनुसार कोटा में करीब 3000 से 4000 हॉस्टल और 500 से 1200 मेस संचालित हैं, जहां लगभग 1 लाख के करीब छात्र आईआईटी-जेईई और नीट जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करते हुए रहते हैं. कमर्शियल गैस की सप्लाई प्रभावित होने से मेस संचालकों के सामने भोजन व्यवस्था बनाए रखना बड़ी चुनौती बन गया है.
कई मेसों में नाश्ता बंद कर दिया गया- मेस संचालक
मेस संचालक जुनेद अख्तर का कहना है कि गैस नहीं मिलने के कारण कई मेसों में नाश्ता बंद कर दिया गया है. तो कुछ ने अस्थायी रूप से सेवाएं कम कर दी हैं. छोटे मेस संचालक तो अगले एक-दो दिन में मेस बंद करने की तैयारी में भी हैं. कई जगहों पर मेन्यू छोटा कर दिया गया है- जहां पहले दो सब्जियां परोसी जाती थीं. अब थाली में सिर्फ एक सब्जी दी जा रही है. शाम का नाश्ता भी कई मेसों में बंद कर दिया गया है.
इंडक्शन चूल्हों की मांग बढ़ी- इंडक्शन व्यापारी
वहीं इंडक्शन व्यापारी नरेश मीणा ने कहा, "गैस संकट के चलते शहर में भट्ठी और कोयले के चूल्हों की मांग अचानक बढ़ गई है. कारीगरों के पास नए भट्ठे बनाने के ऑर्डर लगातार आ रहे हैं. वहीं दूसरी ओर इंडक्शन चूल्हों की मांग भी बढ़ गई है. जिसके चलते कई दुकानों में इनका स्टॉक तक खत्म हो चुका है. हालांकि बड़े पैमाने पर खाना पकाने के लिए बिजली और इंडक्शन पर्याप्त साबित नहीं हो रहे हैं. इसलिए अधिकांश मेस संचालक लकड़ी और कोयले का सहारा ले रहे हैं."
एक और मेस संचालक कुलविंदर सिंह ने बताया कि इस संकट का असर सीधे छात्रों की थाली पर दिखाई दे रहा है. रोटी की संख्या कम हो रही है. सूखा नाश्ता दिया जा रहा है और मेन्यू सीमित कर दिया गया है. कई छात्र इसे लेकर परेशान हैं और जल्द गैस आपूर्ति सामान्य होने की उम्मीद कर रहे हैं. बताया जा रहा है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मध्य-पूर्व में बढ़े तनाव और सप्लाई चेन प्रभावित होने से कमर्शियल गैस की उपलब्धता कम हुई है. इसके चलते बाजार में कीमतें भी बढ़ गई हैं और ब्लैक मार्केटिंग की शिकायतें भी सामने आ रही हैं. फिलहाल कोटा के हॉस्टल और मेस संचालक वैकल्पिक व्यवस्थाओं के सहारे किसी तरह भोजन व्यवस्था बनाए रखने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन यदि जल्द ही गैस सप्लाई सामान्य नहीं हुई तो शहर के कई मेस बंद होने की स्थिति में आ सकते हैं.
गैस नहीं मिलने के कारण फूड स्टॉल और ठेले हो रहे बंद- स्ट्रीट वेंडर
इसके अलावा स्ट्रीट वेंडर का कहना है कि कमर्शियल गैस सिलेंडर का असर स्ट्रीट वेंडर्स पर भी पड़ा है. इन स्ट्रीट वेंडर्स पर चाय, पराठे, छोले-भटूरे बनाने वाले लोगों के सामने बड़ी समस्या आ गई है. कमर्शियल सिलेंडर नहीं मिलने से इन्हें अपने फूड स्टॉल और ठेले भी बंद करने पड़ रहे हैं. वहीं एक स्ट्रीट वेंडर ने जानकारी देते हुए बताया कि उसके पास आज का ही गैस का स्टॉक बचा है. इसके बाद उसका फूड स्टॉल भी बंद होने के कगार पर है. कोटा शहर की कई सड़कों पर ऐसे स्ट्रीट वेंडर देखे जा सकते हैं जो कमर्शियल सिलेंडर पर ही अपना व्यवसाय चला रहे हैं, जो अब बंद होने के कगार पर है.
