जोधपुर में खुली जेल (ओपन जेल) को कैदियों के पुनर्वास और समाज की मुख्यधारा में शामिल करने के उद्देश्य से बनाया गया था, लेकिन यहां की जमीनी हकीकत इससे पूरी तरह उलट है. कैदी परिवार समेत जेल से भी बदतर हालात में जीने को मजबूर हैं. जर्जर क्वार्टर, टपकती छतें, पानी भरना और शौचालय की कमी ने उनकी जिंदगी नर्क बना दी है.
खुली जेल में रह रहे कैदियों का आरोप है कि सरकारी क्वार्टर बेहद जर्जर हालत में हैं. कई मकान खंडहर जैसी स्थिति में पहुंच चुके हैं. बारिश के मौसम में छतों से पानी टपकता है और कमरों में पानी भर जाता है, जिससे परिवारों के लिए रहना मुश्किल हो जाता है. महिलाओं और बच्चों के लिए शौचालय की सबसे बड़ी समस्या है. परिसर में पर्याप्त शौचालय नहीं होने के कारण कैदियों को अस्थायी व्यवस्था पर निर्भर रहना पड़ रहा है.
जयपुर के गांव में चांदी के सिक्के निकलने की खबर, खजाने के लिए ग्रामीणों ने रातभर की खुदाई
कैदियों ने बताई पीड़ा
खुली जेल में बंद कैदी भोमाराम ने बताया, “हमें अच्छे आचरण के आधार पर यहां भेजा गया था ताकि परिवार के साथ सम्मानजनक जीवन जी सकें, लेकिन यहां बुनियादी सुविधाएं तक उपलब्ध नहीं हैं. क्वार्टरों की हालत खस्ता है, बारिश में पानी भर जाता है. शौचालय और पीने के पानी की नियमित व्यवस्था नहीं है. कई बार तो यह स्थिति बंद जेल की सजा से भी ज्यादा कठिन लगती है.”
उद्देश्य विफल, मांगें बढ़ीं
खुली जेल की अवधारणा कैदियों को खेती-किसानी और श्रम के जरिए सुधारने तथा परिवार के साथ रहने का अवसर देने के लिए शुरू की गई थी. लेकिन यदि बुनियादी सुविधाएं ही नहीं मिलेंगी तो इस व्यवस्था का उद्देश्य अधूरा रह जाएगा. कैदियों ने प्रशासन से तुरंत क्वार्टरों की मरम्मत, नए शौचालयों का निर्माण और नियमित पेयजल आपूर्ति की मांग की है.
कैदियों का कहना है कि अगर न्यूनतम सुविधाएं भी उपलब्ध नहीं होंगी तो खुली जेल की व्यवस्था सिर्फ नाम की रह जाएगी. उन्होंने जिला प्रशासन और जेल विभाग से जल्द हस्तक्षेप की अपील की है ताकि परिवारों के साथ उनका जीवन कुछ हद तक सुगम हो सके.
यह स्थिति न सिर्फ कैदियों बल्कि उनके परिवारों खासकर महिलाओं और बच्चों के स्वास्थ्य और गरिमा पर भी सवाल उठा रही है. विशेषज्ञों का मानना है कि खुली जेलों में बुनियादी ढांचे को मजबूत किए बिना पुनर्वास की बात करना व्यर्थ है.
CM भजनलाल शर्मा का साइबर ठगों पर बड़ा एक्शन, कहा- सिर्फ गिरफ्तारी नहीं, अब आर्थिक कमर भी तोड़ें
