Rajasthan News: कहते हैं न, भगवान के घर देर है, अंधेर नहीं. इंसान को अपने पापों की सजा अवश्य मिलती है. ऐसा ही हुआ एक शातिर अपराधी के साथ, जिसने अपने ऐशो-आराम और अय्याशी के लिए भगवान के मंदिरों तक को नहीं छोड़ा. वह मंदिरों में चढ़ाए गए आभूषणों को भी चुरा लेता था. आखिरकार, अब वह सलाखों के पीछे है.

राजस्थान के जोधपुर रेंज आईजी विकास कुमार की साइक्लोनर टीम को एक के बाद एक बड़ी सफलता मिल रही है. एक ऑपरेशन के तहत साइक्लोनर टीम ने 2 साल से फरार 50 हजार रुपये के इनामी आरोपी को दबोच लिया है. पुलिस ने बताया कि आरोपी बद्रीराम की कई महिला मित्र हैं. उन्हीं में से एक से मिलने से पहले वह एक सर्विस सेंटर पर अपनी SUV गाड़ी धुलवाने पहुंचा था.

पूछताछ में सामने आया कि मंदिरों में चोरी करने के अपने पापों का प्रायश्चित करने के लिए आरोपी 8 महीने तक बागेश्वर धाम में रुका, लेकिन वहां उसकी पर्ची नहीं आई. इसके बाद वह एक महीना महाकुंभ में घूमता रहा.

बद्रीराम पर कई आरोप हैं दर्जजोधपुर रेंज IG विकास कुमार ने बताया कि शराब तस्कर बद्रीराम (42 वर्षीय) को जोधपुर के ओसिया से मंगलवार (4 मार्च) को गिरफ्तार किया गया. वह 1998 से अपराध की दुनिया में सक्रिय है. शुरुआत में वह मंदिरों में चोरी करता था, फिर शराब तस्करी करने लगा. बद्रीराम पर 25 सालों में 6 जिलों में करीब 44 मुकदमे दर्ज हैं.

पुलिस पिछले 2 सालों से उसकी तलाश कर रही थी. उस पर पुलिस से मारपीट, चोरी और शराब तस्करी के मुकदमे दर्ज हैं. वह राजस्थान और हरियाणा के बीच हो रही शराब तस्करी में अहम भूमिका निभा रहा था. वहीं, 2023 में रेप और पोक्सो के मामले में जमानत मिलने के बाद से ही वह फरार था.

रेंज IG ने बताया कि पूछताछ में पता चला कि अपराध की दुनिया में कदम रखने के शुरुआती दौर में बद्रीराम मंदिरों से आभूषण चुराता था. वह अपने पापों का प्रायश्चित करने उन मंदिरों में जाकर धोक भी देता था. पुलिस को इस बारे में इनपुट मिला था, तभी से पुलिस उसके पीछे लगी हुई थी. इसी दौरान, जोधपुर के ओसिया में वह अपनी महिला मित्र से मिलने आया था. मिलने से पहले वह ओसिया में एक कार सर्विस सेंटर पर अपनी SUV गाड़ी धुलवा रहा था. यहीं पर साइक्लोनर टीम ने उसे दबोच लिया.

आरोपी ने वृंदावन, बागेश्वर धाम और महाकुंभ में बिताया समय- पुलिसरेंज IG विकास कुमार ने बताया कि फरारी के दौरान बद्रीराम ने वृंदावन, बागेश्वर धाम (8 महीने) और महाकुंभ (1 महीना) में समय बिताया. पैसे खत्म होने पर वह अपनी एक महिला मित्र से मिलने आया, लेकिन वह नहीं मिली. फिर दूसरी मित्र को फोन कर कार वॉश करवा रहा था, तभी पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया.

25 सालों में उस पर 44 मुकदमे दर्ज हुए हैं. पहले उसके पिता जमानत करवाते थे, लेकिन जेल से छूटकर वह फिर तस्करी में लग जाता. पिता की मौत के बाद उसने मां को सरपंच चुनाव लड़वाया. वहीं पुलिस को उसकी एक महिला मित्र से इनपुट मिला, जिसके आधार पर साइक्लोनर टीम ने उसे दबोच लिया.

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