राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत आज (26 मई) जोधपुर दौरे पर पहुंचे, जहां एयरपोर्ट पर मीडिया से बातचीत करते हुए उन्होंने राज्य की बीजेपी सरकार पर तीखा हमला बोला. गहलोत ने कहा कि बीजेपी सरकार के बारह साल पूरे होने जा रहे हैं, लेकिन जनता को कोई बड़ी उपलब्धि नहीं मिली. उन्होंने आरोप लगाया कि धर्म के नाम पर राजनीति कर बीजेपी सत्ता तक तो पहुंच गई, लेकिन आम आदमी की समस्याओं से उसका कोई लेना-देना नहीं है.

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सरकार शहर-ग्रामीण क्षेत्रों में पानी की समस्या में रही विफल

गहलोत ने जोधपुर में गहराते पेयजल संकट को लेकर सरकार को घेरते हुए कहा कि उनकी सरकार ने वर्षों की मेहनत से इंदिरा गांधी नहर परियोजना के जरिए पानी पहुंचाने का काम किया था. तीसरे चरण के लिए करीब 1400 करोड़ रुपए भी स्वीकृत किए गए थे, ताकि शहर और ग्रामीण क्षेत्रों में पानी की समस्या खत्म हो सके, लेकिन वर्तमान सरकार मॉनिटरिंग में पूरी तरह विफल रही.

उन्होंने दावा किया कि उनके कार्यकाल में जोधपुर में मेडिकल कॉलेज, विश्वविद्यालय, अस्पताल भवन और कई बड़े विकास कार्य हुए. प्रतापनगर, मंडोर अस्पताल और चौपासनी हाउस जैसी इमारतों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि बाहर से आने वाले लोग भी इन भवनों की तारीफ करते हैं, लेकिन मौजूदा सरकार उनकी देखरेख तक नहीं कर पा रही.

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'चिरंजीवी योजना अब केवल कागजों तक सीमित'- गहलोत 

स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर भी गहलोत ने सरकार पर निशाना साधा. उन्होंने कहा कि चिरंजीवी योजना अब केवल कागजों तक सीमित होकर रह गई है. निजी अस्पताल मरीजों से पैसे वसूल रहे हैं और गरीब आदमी को इलाज के लिए अपनी जेब ढीली करनी पड़ रही है.

पंचायत और नगर निगम चुनावों को लेकर भी पूर्व मुख्यमंत्री ने सरकार को घेरा. उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार संविधान की पालना नहीं कर रही और हाईकोर्ट की फटकार के बावजूद चुनाव करवाने में देरी की जा रही है. साथ ही लोकतंत्र और चुनाव आयोग की स्थिति पर चिंता जताते हुए गहलोत ने कहा कि देश में लोकतांत्रिक संस्थाओं पर दबाव बढ़ रहा है, जो चिंताजनक है.

'वर्तमान सरकार सिर्फ पुराने कार्यों का श्रेय ले रही'- गहलोत 

एयरपोर्ट विस्तार और अन्य विकास कार्यों का उल्लेख करते हुए गहलोत ने कहा कि कई बड़ी परियोजनाएं उनके कार्यकाल में शुरू हुई थीं, जबकि वर्तमान सरकार सिर्फ पुराने कार्यों का श्रेय लेने में लगी हुई है. पेपर लीक और ओएमआरएस मामलों पर उन्होंने कहा कि कार्रवाई और गिरफ्तारियां उनके शासनकाल में ही शुरू हो गई थीं, लेकिन वर्तमान सरकार केवल प्रचार तक सीमित है. राजस्थान में हालात गंभीर हैं और सरकार जनता की समस्याओं को लेकर संवेदनशील नजर नहीं आ रही.

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