प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को मन की बात कार्यक्रम में जितेंद्र सिंह राठौर का जिक्र किया. राठौर भरतपुर, राजस्थान से हैं और पेशे से सुरक्षा गार्ड हैं. उन्होंने उन सभी सैनिकों का डेटा संकलित किया है जिन्होंने अपने कर्तव्य के दौरान जीवन का बलिदान दिया. उनका यह प्रयास प्रथम विश्व युद्ध से लेकर वर्तमान समय तक के हजारों सैनिकों को शामिल करता है.

जितेंद्र सिंह राठौर ने ANI से बातचीत में कहा कि मैं भरतपुर, राजस्थान का रहने वाला हूं. पिछले 26 वर्षों से मैं देशभक्ति के मार्ग पर कार्य कर रहा हूं. मेरे लिए गर्व की बात है कि मेरी मेहनत और मेरी आवाज प्रधानमंत्री तक पहुंची. मेरा सपना है कि मैं एक 'शहीद हॉल' बनाऊं, जहां मेरी संकलित जानकारी सुरक्षित रहे और लोगों को दिखाई जा सके."

देश के हर हिस्से से राठौर एकत्रित कर रहे गाथाएं

राठौर ने आगे बताया कि उनका उद्देश्य केवल डेटा इकट्ठा करना नहीं है, बल्कि देश के हर हिस्से के सैनिकों के बलिदान को सही तरीके से रिकॉर्ड और संरक्षित करना है. इसमें सैनिकों के नाम, उनकी शहादत की तारीख और उनकी वीर गाथाएं शामिल हैं. उन्होंने यह भी कहा कि यह कार्य उनके लिए सिर्फ पेशा नहीं बल्कि देशभक्ति का एक मार्ग है.

राठौर की प्रधानमंत्री ने की सराहना

प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में जितेंद्र के योगदान की सराहना की और कहा कि ऐसे लोग नागरिक समाज में देशभक्ति की भावना को जीवित रखते है. पीएम ने युवाओं से भी अपील की कि वे ऐसे प्रयासों से प्रेरणा लें और अपने कर्तव्य के प्रति सजग रहें. जितेंद्र सिंह राठौर का यह प्रयास केवल रिकॉर्डिंग तक सीमित नहीं है.

उनका लक्ष्य है कि आने वाली पीढ़ियां सैनिकों के बलिदान को जानें और उन्हें सम्मान दें. इसके लिए वे शहीद हॉल बनाने की योजना पर कार्य कर रहे हैं, जहां उनकी संकलित जानकारी सुरक्षित रखी जाएगी और जनता के लिए उपलब्ध कराई जाएगी.

26 वर्षों से सैनिकों के लिए कर रहे काम

देशभर में हजारों सैनिकों की कहानियों और उनके बलिदान को संरक्षित करने का यह प्रयास न केवल एक व्यक्ति की प्रतिबद्धता है, बल्कि देश के प्रति नागरिक जिम्मेदारी का उदाहरण भी है. जितेंद्र सिंह राठौर का यह काम याद दिलाता है कि देशभक्ति केवल शब्दों में नहीं बल्कि कार्यों में भी व्यक्त होती है.

इस तरह, 26 वर्षों की मेहनत और समर्पण ने जितेंद्र सिंह राठौर को ऐसे मुकाम पर पहुंचाया है, जहां उनके प्रयासों को प्रधानमंत्री स्तर पर सराहा गया और पूरे देश के लिए प्रेरणा का स्रोत बना.