राजस्थान की राजधानी जयपुर अपनी ऐतिहासिक इमारतों के साथ-साथ अपनी अटूट सांस्कृतिक एकता के लिए भी जानी जाती है. रमजान के पाक महीने के दूसरे शुक्रवार (जुमे) को गुलाबी नगरी ने एक बार फिर दुनिया के सामने अपनी 'गंगा-जमुनी तहजीब' का लोहा मनवाया. शहर में शांति और अमन-चैन के बीच जुमे की विशेष नमाज अदा की गई, जहां इबादत के साथ-साथ इंसानियत और आपसी प्रेम का अनूठा संगम देखने को मिला.

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रमजान का दूसरा जुमा होने के कारण सुबह से ही मस्जिदों में अकीदतमंदों की भारी भीड़ जुटने लगी थी. शहर की अधिकांश मस्जिदों में नमाज का प्रबंध सुचारू रहा, लेकिन जौहरी बाजार स्थित प्रमुख जामा मस्जिद में नमाजियों की संख्या इतनी अधिक हो गई कि मस्जिद परिसर में तिल धरने की जगह नहीं बची. ऐसी स्थिति में, मस्जिद प्रशासन को मजबूरीवश सड़क पर नमाज अदा करने का निर्णय लेना पड़ा.

भाईचारे की नई बानगी: जब व्यापारियों ने बिछाईं पलकें

आमतौर पर सड़कों पर नमाज को लेकर होने वाले विवादों के विपरीत, जयपुर के जौहरी बाजार में दृश्य बिल्कुल अलग था. जैसे ही सड़क पर नमाज शुरू होने की स्थिति बनी, वहां के हिंदू व्यापारियों और स्थानीय लोगों ने आगे बढ़कर मदद की. उन्होंने न केवल अपनी दुकानों के सामने जगह दी, बल्कि नमाजियों के लिए व्यवस्था बनाने में भी हाथ बंटाया. व्यापारिक गतिविधियों के केंद्र में होने के बावजूद, किसी भी व्यापारी ने कोई आपत्ति नहीं जताई, बल्कि इस धार्मिक आयोजन का सम्मान किया.

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प्रशासनिक मुस्तैदी और जन-सहयोग

पुलिस प्रशासन ने सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए थे. नमाज के समय यातायात को सुचारू रखने के लिए ट्रैफिक डाइवर्ट किया गया था. इस दौरान पुलिसकर्मियों के कंधे से कंधा मिलाकर दूसरे समुदाय के लोग भी ट्रैफिक संभालते और नमाजियों को रास्ता दिखाते नजर आए. प्रशासन और जनता के बीच इस तालमेल ने सुनिश्चित किया कि राहगीरों को परेशानी न हो और इबादत भी सुकून से संपन्न हो.

त्योहारों से जुड़ेगा दिलों का रिश्ता

नमाज के बाद मुल्क की खुशहाली, तरक्की और आपसी भाईचारे के लिए खास दुआएं मांगी गईं. इस मौके पर मुस्लिम समुदाय के लोगों ने भावुक होते हुए कहा कि जयपुर की यह साझी विरासत ही हमारी असली पहचान है. उन्होंने वादा किया कि आने वाली होली पर वे अपने हिंदू भाइयों के उत्सव में हर संभव मदद करेंगे और खुशियां साझा करेंगे. जयपुर की इस घटना ने संदेश दिया है कि यदि नीयत साफ हो, तो धर्म कभी भी विकास और सद्भाव के रास्ते में बाधा नहीं बनता.