राजस्थान में इन दिनों आसमान से आग बरस रही है. प्रचंड गर्मी और लू के थपेड़ों से आम जनजीवन पूरी तरह से बेहाल है. इस भीषण गर्मी के टॉर्चर से इंसानों के साथ-साथ अब भगवान को भी बचाने के लिए खास जतन किए जा रहे हैं. राजधानी जयपुर के आराध्य देव गोविंद देव जी महाराज (Govind Dev Ji Temple) के मंदिर में आज पूर्णिमा के पावन अवसर पर एक बेहद अनूठा और मनमोहक 'जल वर्षा उत्सव' आयोजित किया गया.
इस अनूठे उत्सव के तहत 43 डिग्री के भारी तापमान के बीच मंदिर के गर्भगृह में विशेष फव्वारे लगाए गए. दोपहर के वक्त करीब 15 मिनट तक राधा रानी संग विराजमान भगवान कृष्ण की प्रतिमा पर इन फव्वारों के जरिए 'कृत्रिम जलवर्षा' (Artificial Rain) की गई. यह अद्भुत नजारा देखकर वहां मौजूद हर भक्त भाव-विभोर हो गया.
क्या है इस 'जल यात्रा उत्सव' की मान्यता?
शास्त्रों और मान्यताओं के मुताबिक, यह आर्टिफिशियल बारिश भगवान को ज्येष्ठ महीने की भीषण गर्मी के प्रकोप से बचाने के लिए कराई जाती है. ऐसी गहरी आस्था है कि गर्भगृह में भगवान पर इस 'जल यात्रा उत्सव' के आयोजन के बाद मौसम का मिजाज कुछ नरम पड़ जाता है और आम लोगों को भी आसमान से बरस रही इस आग (Heatwave) से थोड़ी राहत मिल जाती है. इस दौरान पुजारियों और भक्तों ने भगवान से गर्मी के प्रकोप से बचाने के लिए खास प्रार्थना भी की.
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गर्मी की परवाह किए बिना उमड़ा आस्था का सैलाब
43 डिग्री के उबलते तापमान में भी अपने आराध्य की एक झलक पाने के लिए हजारों की संख्या में श्रद्धालु मंदिर पहुंचे. गर्मी की परवाह किए बिना भक्त पूरी तरह से भक्ति भाव में मगन नजर आए. आलम यह था कि जल यात्रा उत्सव के दौरान मंदिर परिसर में तिल रखने की भी जगह नहीं बची थी.
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