मध्य पूर्व (Middle East) में चल रहे युद्ध का सीधा असर अब भारत की रसोइयों तक पहुंच गया है. रसोई गैस के गहराते संकट के बीच राजस्थान की राजधानी जयपुर में कोयले की मांग अचानक आसमान छूने लगी है.

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हालात ये हैं कि बाजार से लकड़ी और पत्थर का कोयला लगभग गायब हो चुका है और लोगों को मजबूरी में चीनी (Chinese) कोयले का रुख करना पड़ रहा है.

कीमतों में 20% का उछाल और राशनिंग

कोयले की अचानक बढ़ी खपत के कारण इसकी कीमतों में लगभग 20 प्रतिशत तक का भारी उछाल आया है. जयपुर में कोयले की किल्लत इतनी ज्यादा है कि आम ग्राहकों तो दूर, रिटेल कारोबार करने वाले दुकानदारों को भी पर्याप्त मात्रा में माल नहीं मिल पा रहा है. स्टॉक को बनाए रखने के लिए बाजार में अघोषित राशनिंग लागू हो गई है:

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  • आम ग्राहकों को अधिकतम केवल 20 किलो कोयला दिया जा रहा है.
  • रिटेल दुकानदारों के लिए यह सीमा 200 किलो तय कर दी गई है.

कोयला खरीदने के लिए मिन्नतें और सिफारिशें

बाजार में स्थिति इतनी विकट हो गई है कि जरूरत से थोड़ा भी ज्यादा कोयला लेने के लिए लोगों को व्यापारियों की मिन्नतें करनी पड़ रही हैं या ऊंची सिफारिशें लगवानी पड़ रही हैं. घरेलू गैस खत्म होने के कारण आम लोग तो परेशान हैं ही, लेकिन सबसे ज्यादा संकट होटल, रेस्टोरेंट और ढाबा संचालकों के सामने खड़ा हो गया है. इसके अलावा, शादी-ब्याह और अन्य बड़े आयोजनों में भी खाना पकाने के लिए कोयले की भारी खरीदारी हो रही है.

व्यापारियों का मलाल: ग्राहकों की जरूरत नहीं कर पा रहे पूरी

डिमांड बढ़ने से कोयला कारोबारियों के व्यापार में भले ही तेजी आई हो, लेकिन उन्हें इस बात का मलाल है कि वे मुश्किल वक्त में लोगों की जरूरत के मुताबिक सप्लाई नहीं दे पा रहे हैं. कारोबारियों का कहना है कि उन्होंने कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि कोयले की दुकानों पर लोगों की इतनी भारी भीड़ उमड़ेगी और कोयला बेचने के लिए सिफारिशें सुननी पड़ेंगी.

झारखंड से रुकी सप्लाई, खदानों में लग रहे नंबर

जयपुर के चांदपोल इलाके में पिछले 55 सालों से कोयले का कारोबार कर रहे खंडेलवाल परिवार ने बताया कि निचले स्तर पर मांग बहुत अधिक है, लेकिन ऊपर (झारखंड) से सप्लाई बाधित हो रही है.

खंडेलवाल परिवार ने कहा कि खदानों से बाकायदा नंबर लगाकर ही कोयला जारी किया जा रहा है. माल की जल्द से जल्द डिलीवरी सुनिश्चित करने के लिए ट्रक ड्राइवरों को बिना रुके सफर करने के निर्देश दिए जा रहे हैं. इसके लिए ट्रांसपोर्टर्स और ड्राइवरों को अतिरिक्त पैसे भी चुकाने पड़ रहे हैं.

फिलहाल, जब तक रसोई गैस की आपूर्ति पूरी तरह सामान्य नहीं हो जाती, तब तक जयपुर में कोयले के इस संकट से राहत मिलने के आसार कम ही नजर आ रहे हैं.