अगर आप जयपुर की सड़कों पर रोज ट्रैफिक जाम में फंसते हैं, तो जल्द आपको बड़ी राहत मिल सकती है. अब शहर में पुराने फिक्स टाइम वाले ट्रैफिक सिग्नलों की जगह आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से चलने वाला इंटेलिजेंट ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम (ITMS) काम करेगा. 

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यानी अब सिग्नल का समय घड़ी नहीं, बल्कि सड़क पर मौजूद वाहनों की संख्या तय करेगी. जहां ज्यादा ट्रैफिक होगा, वहां ग्रीन सिग्नल ज्यादा देर तक रहेगा और जहां कम वाहन होंगे, वहां समय अपने आप घट जाएगा.

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39 दिन का ट्रायल सफल, अब 253 चौराहों पर तैयारी

राजस्थान के डीजीपी राजीव कुमार शर्मा की पहल पर जयपुर ट्रैफिक पुलिस ने 'डेटा कोर इन्फोटेक' के सहयोग से रामबाग सर्किल पर इस तकनीक का 39 दिनों तक ट्रायल किया. 3 जून से 11 जुलाई तक चले इस पायलट प्रोजेक्ट को सफल बताया गया है. अब शहर के 423 में से 253 प्रमुख चौराहों पर इस स्मार्ट सिस्टम को लागू करने की तैयारी चल रही है. पूरे प्रोजेक्ट की निगरानी ट्रैफिक डीसीपी योगेश गोयल ने की.

AI खुद समझेगा कहां है जाम, खुद बदलेगा सिग्नल

इस सिस्टम में लगे स्मार्ट कैमरे चौबीसों घंटे हर लेन पर नजर रखेंगे. AI यह तय करेगा कि किस दिशा में वाहनों की कतार ज्यादा है और उसी हिसाब से ग्रीन सिग्नल का समय बढ़ा या घटा देगा. इससे ट्रैफिक को नियंत्रित करने के लिए हर बार पुलिसकर्मी की जरूरत नहीं पड़ेगी और चौराहों पर अनावश्यक इंतजार भी कम होगा.

ट्रायल के दौरान बिना किसी मानवीय हस्तक्षेप के 4.88 लाख से ज्यादा वाहनों की आवाजाही सुचारु रही. हर लेन में वाहन चालकों का 8 से 45 सेकंड तक समय बचा. इसके साथ ही ट्रैफिक जाम कम होने से करीब 2,535 किलोग्राम कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन भी कम दर्ज किया गया.

नियम तोड़ने वालों पर भी रखेगा नजर

यह AI सिस्टम केवल ट्रैफिक कंट्रोल ही नहीं करेगा, बल्कि ओवरस्पीडिंग, रेड लाइट जंप, रॉन्ग साइड ड्राइविंग और लेन उल्लंघन जैसे मामलों पर भी स्वतः नजर रखेगा. यदि किसी वाहन का पुराना चालान लंबित होगा, तो उसकी जानकारी भी तुरंत कंट्रोल रूम तक पहुंच जाएगी.

भविष्य में इस तकनीक को और उन्नत बनाकर एम्बुलेंस, फायर ब्रिगेड और अन्य आपातकालीन वाहनों के लिए अपने आप ग्रीन कॉरिडोर तैयार किया जाएगा. इससे न केवल लोगों का समय और ईंधन बचेगा, बल्कि जयपुर की ट्रैफिक व्यवस्था पहले से अधिक स्मार्ट, तेज और सुविधाजनक बनने की उम्मीद है.

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