राजस्थान के जयपुर और जोधपुर सहित कई बड़े शहरों में सीरियल ब्लास्ट की खौफनाक साजिश रचने वाले 'इंडियन मुजाहिदीन' (IM) के आतंकी नेटवर्क को लेकर एक बड़ा अपडेट सामने आया है. जोधपुर महानगर की अपर जिला न्यायाधीश (ADJ) संख्या-3 ने सुप्रीम कोर्ट से जमानत पर रिहा हुए संदिग्ध आतंकी मोहम्मद अमार यासिर की जमानत को तुरंत प्रभाव से खारिज कर दिया है. कोर्ट ने उसे प्रोडक्शन वारंट पर तलब किया है. बता दें कि अमार फिलहाल झारखंड एटीएस (ATS) की कार्रवाई के बाद वहां की जेल में बंद है.

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झारखंड में फिर हुई थी गिरफ्तारी

लोक अभियोजक दिनेश कुमार शर्मा ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने मोहम्मद अमार यासिर की जमानत मंजूर करते हुए एडीजे कोर्ट को शर्तें तय करने के निर्देश दिए थे. कोर्ट ने शर्त रखी थी कि वह भविष्य में किसी भी देश विरोधी या गैरकानूनी गतिविधि में शामिल नहीं होगा. लेकिन पिछले साल झारखंड में एटीएस की टीम ने कार्रवाई करते हुए अमार को फिर से गिरफ्तार कर लिया.

जमानत की शर्तों का यह स्पष्ट उल्लंघन था. इसी आधार पर एटीएस की ओर से लोक अभियोजक दिनेश कुमार शर्मा ने एडीजे कोर्ट में उसकी जमानत खारिज करने का आवेदन पेश किया. इस पर सुनवाई करते हुए एडीजे देवेन्द्र सिंह भाटी ने अमार की जमानत खारिज कर दी और उसे सरेंडर करने के निर्देश दिए. चूंकि वह अभी झारखंड की जेल में है, इसलिए उसे प्रोडक्शन वारंट के जरिए जोधपुर जेल लाने का आदेश जारी किया गया है.

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क्या है पूरा मामला? विदेशी पर्यटकों को निशाना बनाने की थी साजिश

एटीएस की टीम ने 23 मार्च 2014 को जोधपुर के प्रतापनगर थाने में एफआईआर दर्ज कर इंडियन मुजाहिदीन के इस बड़े नेटवर्क का भंडाफोड़ किया था. इस मामले में आईएम के सरगना तहसीन अख्तर उर्फ मोनू और पाकिस्तानी आतंकी जिया उर रहमान उर्फ वकास सहित कुल 12 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया था. पूछताछ में इन आतंकियों ने कबूल किया था कि वे जोधपुर में आने वाले विदेशी पर्यटकों को निशाना बनाने और प्रदेश में सीरियल धमाके करने की साजिश रच रहे थे. एटीएस ने इन्हें बम बनाते हुए रंगे हाथों पकड़ा था.

UAPA और देशद्रोह की धाराओं में दाखिल हुई थी चार्जशीट

एटीएस ने 18 सितंबर 2014 को 10 आतंकियों (बरकत, साकिब, अशरफ, जहीर हक, मोहम्मद जावेद, मशरफ इकबाल, आबिद अंसारी, मोहम्मद वकार अजहर, मोहम्मद मारूफ और मोहम्मद अमार) के खिलाफ चार्जशीट पेश की थी. इसके बाद 9 जनवरी 2015 को सरगना तहसीन और पाकिस्तानी आतंकी वकास के खिलाफ विधि विरुद्ध गतिविधि निवारण अधिनियम (UAPA), विस्फोटक पदार्थ अधिनियम और आईपीसी की धारा 120 बी, 121 (देशद्रोह), 121 ए, 122 सहित कई गंभीर धाराओं में चार्जशीट दाखिल की थी. उस समय ये दोनों आतंकी दिल्ली की जेल में बंद थे.

केस का मौजूदा स्टेटस

अदालत में एटीएस की ओर से इस पूरे मामले में पक्ष रखा जा चुका है. कुल 12 आरोपियों में से 8 आरोपियों के बयान (बयान मुलजिम) हो चुके हैं. शेष 4 आरोपियों के बयान होने के बाद बचाव पक्ष की ओर से पैरवी की जाएगी. ट्रायल के दौरान 10 आरोपियों को जमानत मिल गई थी, जिनमें से अब अमार यासिर की जमानत शर्तों का उल्लंघन करने पर रद्द कर दी गई है.

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