राजस्थान में आईआईटी (जोधपुर) ने बड़ा कर दिया है. अब सिर्फ सूरज की धूप से एनर्जी स्टोर की जाएगी. दरअसल भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) जोधपुर के वैज्ञानिकों ने स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल करते हुए ऐसा स्मार्ट मैटेरियल विकसित किया है, जो सूर्य की दृश्य रोशनी (Visible Light) से ऊर्जा को संचित करने में सक्षम है. 

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यह तकनीक भविष्य में ऊर्जा भंडारण, स्मार्ट उपकरणों और स्वच्छ ऊर्जा प्रणालियों में बड़ा बदलाव ला सकती है. IIT जोधपुर के रसायन विज्ञान विभाग की सहायक प्रोफेसर डॉ. मोनिका गुप्ता के नेतृत्व में विकसित इस शोध की खास बात यह है कि यह पराबैंगनी (UV) किरणों के बजाय सूर्य की सामान्य दृश्य रोशनी का प्रभावी उपयोग करता है. 

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अब तक UV प्रकाश पर काम करता था स्मार्ट मैटेरियल

अब तक अधिकांश स्मार्ट मैटेरियल केवल UV प्रकाश पर ही काम करते थे, जबकि सूर्य के प्रकाश का सबसे बड़ा हिस्सा दृश्य प्रकाश होता है. शोधकर्ताओं ने मॉलिक्यूलर फोटोस्विच (Molecular Photoswitches) विकसित किए हैं, जो सूर्य की रोशनी पड़ने पर अपनी संरचना बदलते हैं और ऊर्जा को प्रभावी ढंग से संग्रहित करते हैं. 

इस तकनीक को मॉलिक्यूलर सोलर थर्मल एनर्जी स्टोरेज (MOST) से भी जोड़ा गया है, जिसके माध्यम से सूर्य की ऊर्जा को लंबे समय तक सुरक्षित रखकर आवश्यकता पड़ने पर गर्मी के रूप में उपयोग किया जा सकेगा. वैज्ञानिकों के अनुसार, इस स्मार्ट मैटेरियल में प्रकाश पड़ने पर इसके ऑप्टिकल (Optical) और मैकेनिकल (Mechanical) गुणों में परिवर्तन होता है. 

इस काम के लिए किया जा सकता है उपयोग

भविष्य में इसका उपयोग स्मार्ट विंडो, स्वयं परिस्थितियों के अनुसार बदलने वाले पदार्थ, प्रकाश संचालित मशीनें, स्मार्ट कोटिंग, उन्नत फोटोनिक सिस्टम और ऊर्जा भंडारण उपकरणों में किया जा सकता है. डॉ. मोनिका गुप्ता ने बताया कि प्रकृति हमें हर दिन भरपूर सूर्य प्रकाश देती है, लेकिन वर्तमान तकनीकें उसका पूरा लाभ नहीं उठा पातीं. 

IIT जोधपुर का यह शोध प्राकृतिक सूर्य प्रकाश का अधिकतम उपयोग कर स्वच्छ ऊर्जा तकनीकों को नई दिशा देने की क्षमता रखता है. उन्होंने कहा कि यह नवाचार ऊर्जा संकट से निपटने और नवीकरणीय ऊर्जा के प्रभावी उपयोग में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है.

IIT जोधपुर का यह शोध भविष्य की ऊर्जा तकनीकों के विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, जिससे पर्यावरण अनुकूल और टिकाऊ ऊर्जा समाधान विकसित करने में मदद मिलेगी.

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