कभी देश को आतंकवाद से बचाने की जिम्मेदारी निभाने वाला पूर्व NSG कमांडो अब खुद नशे के जहर का सौदागर बन बैठा है. विष के इस व्यापार का वह मुख्य कर्ता-धर्ता था, जिसे अब पुलिस ने दबोच लिया है. आरोप है कि बजरंग सिंह नाम का यह पूर्व कमांडो गांजा तस्करी गिरोह का सरगना है. पुलिस को उसके पास से भारी मात्रा में गांजा भी बरामद हुआ है.

पुलिस महानिरीक्षक विकास कुमार ने बताया कि नशे के खिलाफ महासंग्राम में, ATS और ANTF की संयुक्त टीमों ने लगातार दूसरे दिन भी बड़ी कार्रवाई की. तेलंगाना और ओडिशा से बड़े पैमाने पर राजस्थान में गांजे की तस्करी करने वाले एक मुख्य सूत्रधार को गिरफ्तार किया गया. 

सीकर जिले का रहने वाला है बजरंग सिंह

आईजी विकास कुमार ने बताया कि गिरफ़्तार आरोपी बजरंग सिंह, पुत्र भंवर सिंह, सीकर जिले के फतेहपुर शेखावाटी थाना क्षेत्र के करंगा ग्राम का निवासी है. उसकी गिरफ्तारी और गांजा तस्करी पर प्रभावी अंकुश लगाने के लिए ऑपरेशन गांजनेय शुरू किया गया था, जो करीब दो महीने की मेहनत के बाद सफल हुआ.

बजरंग की गिरफ्तारी पर ₹25,000 का इनाम घोषित था. वह राजस्थान, ओडिशा और तेलंगाना के बीच गांजा तस्करी के अवैध धंधे का एक बड़ा लिंक रहा है.

कमांडो से तस्कर तक का सफर

दसवीं तक की पढ़ाई करने के बाद बजरंग का पढ़ाई में मन नहीं लगा. उसकी 6 फीट की पहलवानी कद-काठी को देखकर उसे बीएसएफ में सिपाही के पद पर नौकरी मिल गई. बीएसएफ में सेवा के दौरान उसने पंजाब, असम, पश्चिम बंगाल, ओडिशा और राजस्थान में देश की सीमाओं की सुरक्षा और नक्सलवाद से मुकाबले में अहम योगदान दिया.

 उसकी शारीरिक क्षमता और सेवा भावना को देखते हुए अधिकारियों ने उसे एनएसजी कमांडो टीम में शामिल कर लिया. वहां उसने 7 साल तक आतंकवाद विरोधी अभियानों में बतौर कमांडो सेवा दी.

सेवानिवृत्ति के बाद बदल गया रास्ता

2021 में अर्द्धसैन्य सेवाबलों की अपनी सेवा से सेवानिवृत होकर जब बजरंग सिंह अपने गांव वापस लौटा तो उसकी राजनैतिक महत्वाकांक्षा हिलोरे लेनी लगी और उसने एक राष्ट्रीय दल की गतिविधियों में बढ़ चढ़कर हिस्सा लेना शुरू कर दिया.

बजरंग ने अपनी पत्नी को प्रधानी का चुनाव भी लड़ाया परन्तु चुनाव में पराजय का सामना करना पड़ा. चुनावों में मात तो मिली ही, आपसी दुश्मनी का तोहफा अलग से हाथ लगा साथ ही साथ कई लोगों से घनिष्ठ सम्बन्ध भी स्थापित हो गए.