राजस्थान के डीडवाना कुचामन जिला कलेक्टर के ख़िलाफ़ SDM और तहसीलदारों ने मोर्चा खोल दिया है. कलेक्टर के ख़िलाफ़ पांच पन्नों का पत्र भी मुख्यमंत्री को भेजा गया है. जिसमें नियम विरूद्ध पट्टे जारी करवाने संबंधी कई शिकायतें दी गई है. ज़िले के अधिकांश SDM और तहसीलदारों की ओर से ये शिकायत पत्र लिखा गया है. जिसमें सभी ने अपने नाम के साथ हस्ताक्षर भी किए हैं.

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मामला गंभीर होता दिखाई दे रहा है, क्योंकि जिला कलेक्टर के ख़िलाफ़ एक साथ ज़िले के सभी अधिकारियों ने मोर्चा खोला है ऐसे में अब मामला मुख्यमंत्री स्तर पर देखा जा रहा है. इसकी गूंज अब राज्य की ब्यूरोक्रेसी तक पहुंच गयी है. आखिर प्रशासनिक अधिकारियों में इस तरह का टकराव कैसे आ गया.

विधि विरुद्ध पट्टे जारी करने के आरोप

डीडवाना कुचामन जिला कलेक्टर महेंद्र सिंह खडगावत के ख़िलाफ़ मुख्यमंत्री को लिखे गए पत्र में सरकारी भूमि के नियम विरुद्ध पट्टे जारी करने सहित कई तरह के आरोप लगाए गए हैं. अब इस पत्र को लेकर मुख्यमंत्री कार्यालय स्तर पर जाँच करवाई जा रही है कि आख़िर ये पूरा मामला क्या है?  SDM और तहसीलदार ने पत्र में लिखा की जिला कलक्टर महोदय, एवं अतिरिक्त जिला कलक्टर महोदय, डीडवाना-कुचामन द्वारा जिले में पदस्थापित उपखण्ड अधिकारियों एवं तहसीलदारों से विधि विरूद्व कार्य करवाये जाने एवं अनावश्यक दबाव बनाया जा रहा जो निम्न बिन्दुवार है. विधि विरूद्ध आवंटन प्रस्ताव बनाने का दवाब बनाना व पंजीयन करवाना जैसे नगरीय आबादी, ग्रामीण आबादी प्रतिबंधित भूमियों के पट्टे.

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पट्टा देने का अधिकारी निकाय को होता है

जिला कलक्टर एवं अतिरिक्त जिला कलक्टर महोदय, डीडवाना-कुचामन द्वारा समस्त उपखण्ड अधिकारियों एव तहसीलदारों पर अनावश्यक दवाब बनाया गया है जैसे- शहरी एवं ग्रामीण आबादी में पट्टा देने का अधिकार स्थानीय निकाय को होता है, लेकिन आबादी भूमि में आवंटन प्रस्ताव तैयार करवाने का दबाव लगातार बनाया गया एवं इसमें विधि विरूद्ध पट्टे भी जारी किये गये है.