Bhiwadi Cyber Fraud: राजस्थान में भिवाड़ी पुलिस ने ऑनलाइन शेयर ट्रेडिंग और फर्जी निवेश ऐप के जरिए ठगी करने वाले 2 शातिर साइबर ठगों को गिरफ्तार किया है. पुलिस ने अकाउंट मे मिले करोडो के ट्रांजैक्शन का खुलासा करने में बड़ी सफलता हासिल की है. इस पूरी कार्यवाही को SP भिवाड़ी ज्येष्ठा मैत्रेयी के नेतृत्व में अंजाम दिया गया.
इस कार्रवाई में पुलिस ने 9 लाख 11 हजार 800 रुपये नकद, 10 तोला सोने की ज्वैलरी, एक हुंडई वरना कार, 20 मोबाइल फोन, 54 सिम कार्ड, 10 ATM कार्ड, 2 नोट गिनने की मशीनें, एक लेनोवो टैबलेट और एक वाई-फाई राउटर बरामद किया है. गिरफ्तार अभियुक्तों के बैंक खातों में लगभग 26 करोड़ रुपये का लेन-देन होने की जानकारी सामने आई है. मामला 26 अप्रैल 2025 को सामने आया, जब भिवाड़ी के UIT कॉलोनी निवासी संजीव पुत्र जवान सिंह ने साइबर क्राइम थाना में शिकायत दर्ज की है.
21 लाख रुपये का निवेश किया
संजीव ने बताया कि 1 मार्च 2025 को उनके व्हाट्सएप पर एक मैसेज आया, जिसमें DHANI TRD नामक एक ऑनलाइन निवेश ऐप के बारे में जानकारी दी गई थी. मैसेज में अर्जुन रमेश मेहता नामक व्यक्ति का जिक्र था, जो कथित तौर पर एक प्रतिष्ठित व्यक्ति और चुनाव लड़ने वाला उम्मीदवार था. इस ऐप के जरिए निवेश करने पर 10 प्रतिशत मुनाफे का लालच दिया गया. संजीव ने गूगल सर्च के जरिए इसकी पुष्टि करने की कोशिश की, तो उन्हें यह व्यक्ति विश्वसनीय लगा. इसके बाद उन्हें एक व्हाट्सएप ग्रुप में जोड़ा गया, जिसमें 100 से अधिक मोबाइल नंबर जुड़े थे.
ग्रुप में लगातार मुनाफे की बातें हो रही थीं, जिससे संजीव का विश्वास बढ़ गया. इसके बाद, संजीव के मोबाइल में DHANI TRD नामक फर्जी ऐप इंस्टॉल करवाया गया. शुरुआत में कम राशि का निवेश करवाकर उन्हें ज्यादा मुनाफा दिखाया गया. इस झांसे में आकर संजीव ने कुल 21 लाख रुपये का निवेश कर दिया, लेकिन बाद में उन्हें ठगी का शिकार होने का एहसास हुआ. शिकायत मिलने के बाद, थानाधिकारी जयसिंह RPS और साइबर क्राइम थाना की टीम ने अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक अतुल साहू के सुपरविजन में त्वरित कार्रवाई शुरू की.
6 महीनों में 26 करोड़ रुपये का लेन-देन
तकनीकी सहायता और गहन जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि DHANI TRD ऐप का कोई प्रमाणिकरण नहीं था और यह पूरी तरह फर्जी था. जांच में पता चला कि इस फर्म के विभिन्न बैंकों में 10 खाते संचालित हो रहे थे, जिनमें पिछले 6 महीनों में करीब 26 करोड़ रुपये का लेन-देन हुआ था. आगे की जांच में पुलिस ने पाया कि विकास सैनी के नाम से फर्जी आधार कार्ड और अन्य दस्तावेजों का इस्तेमाल किया गया था. असल में इस फर्म का संचालक इमरान अली पुत्र अनवर अली था.
साइबर क्राइम टीम ने तकनीकी सहायता से इमरान अली और उसके साथी इमरान खान पुत्र जफर मोहम्मद को गिरफ्तार किया. दोनों को 6 दिन के पुलिस रिमांड पर लिया गया, जहां गहन पूछताछ में कई अहम खुलासे हुए. इमरान अली पहले भी दिल्ली में 50 लाख रुपये की डिजिटल अरेस्ट के मामले में गिरफ्तार हो चुका है. दोनों अभियुक्त शातिर अपराधी हैं, जो फर्जी आधार कार्ड और दस्तावेजों का इस्तेमाल कर ठगी की वारदातों को अंजाम देते थे.
अनजान ऐप में पैसा लगाने से पहले जांच जरूरी - SP ज्येष्ठा मैत्रेयी
SP ज्येष्ठा मैत्रेयी ने कहा, साइबर ठगों के खिलाफ पुलिस की कार्रवाई लगातार जारी रहेगी और आम जनता को साइबर ठगी से बचने के लिए जागरूक रहना होगा. उन्होंने कहा कि किसी भी अनजान ऐप या निवेश योजना में पैसा लगाने से पहले उसकी विश्वसनीयता की जांच जरूरी है.
पुलिस ने जनता से अपील की है कि वे ऑनलाइन निवेश या शेयर ट्रेडिंग से संबंधित किसी भी ऑफर पर आंख मूंदकर भरोसा न करें. किसी भी ऐप को डाउनलोड करने या निवेश करने से पहले उसकी प्रामाणिकता की जांच करें और संदिग्ध गतिविधियों की सूचना तुरंत नजदीकी पुलिस स्टेशन या साइबर क्राइम थाना को दें.